जिला स्तरीय वनाधिकार समिति की बैठक संपन्न, लंबित आवेदनों के शीघ्र निष्पादन का निर्देश

सरायकेला, 12 जुलाई : जिला समाहरणालय सभागार में शनिवार को उप विकास आयुक्त रीना हांसदा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय वनाधिकार समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में चांडिल अनुमंडल पदाधिकारी समेत समिति के अन्य जिला स्तरीय सदस्यगण तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत प्राप्त व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार पट्टों से संबंधित लंबित आवेदनों की अंचलवार समीक्षा की गई। उप विकास आयुक्त ने सभी लंबित आवेदनों के त्वरित निपटान के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया और कहा कि योग्य लाभुकों को शीघ्रता से वन पट्टा निर्गत कर योजना का लाभ सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही जिला स्तर पर समेकित सूची तैयार करने का निर्देश भी दिया गया।
बैठक के उपरांत उप विकास आयुक्त ने जानकारी दी कि अब तक जिले में कुल 06 व्यक्तिगत वन अधिकार (IFR) और 07 सामुदायिक वन अधिकार (CFR) से संबंधित आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन सभी आवेदनों की जांच के उपरांत पात्र लाभुकों को नियमानुसार अधिकार पत्र (पट्टा) जारी करने की प्रक्रिया चल रही है।
सुश्री हांसदा ने यह भी निर्देश दिया कि वन अधिकार अधिनियम के तहत अधिक से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए जिलेभर में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। पंचायत स्तर पर जागरूकता शिविरों के आयोजन के साथ-साथ प्रचार-प्रसार के विभिन्न माध्यमों का उपयोग कर योजना की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
वन अधिकार अधिनियम 2006 का उद्देश्य:
इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य वन भूमि पर परंपरागत रूप से निर्भर अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य परंपरागत वनवासी समुदायों को उनके आवास और आजीविका हेतु अधिकार प्रदान करना है। इसमें दो प्रकार के अधिकार शामिल हैं – व्यक्तिगत वन अधिकार (IFR): पात्र परिवारों को उनके कब्जे की वन भूमि पर स्वामित्व का अधिकार। दूसरा सामुदायिक वन अधिकार (CFR): ग्राम समुदाय को सामूहिक रूप से वन संसाधनों के संरक्षण, उपयोग और प्रबंधन का अधिकार।
अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि इस दिशा में सभी संबंधित विभाग समन्वय स्थापित करते हुए कार्य करें, ताकि वनवासियों को उनका वाजिब हक समय पर प्राप्त हो सके।



