गुरु पूर्णिमा पर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने रांची में पहानों को किया सम्मानित, कहा – “ये हमारी संस्कृति की जीवंत परंपरा हैं”

विशेष रिपोर्ट ,मनभूम अपडेट्स,10 जुलाई ,रांची, झारखंड : गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने रांची में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में परंपरागत आदिवासी धार्मिक अगुआ—पहान, मांझी, मानकी और मुंडा को सम्मानित किया।
रघुवर दास ने इस अवसर पर कहा – “पहान, मांझी, मानकी और मुंडा सिर्फ पद नहीं, बल्कि हमारी परंपराओं, खेत-खलिहान, जंगल, नदी और इंसानी रिश्तों को जोड़ने वाले सांस्कृतिक सूत्र हैं। आज के दिन हम उन परंपराओं को नमन करते हैं जिन्होंने समाज को जड़ से जोड़े रखा।”
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा – “हमारे राज्य की आत्मा इन परंपराओं में बसती है। पहान सिर्फ पूजा-पाठ करने वाले नहीं, बल्कि जल-जंगल-जमीन और इंसानी संवेदना को बचाने वाले रक्षक हैं। सरकार को चाहिए कि इनके लिए अलग से नीति बनाकर इन्हें विभिन्न प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराई जाए।”
उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा जैसे अवसरों पर ऐसे सांस्कृतिक गुरुओं को सम्मानित करना हमारी जिम्मेदारी है।

पूर्व मुख्यमंत्री की भूमिका
रघुवर दास झारखंड के पहले गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री रहे हैं। वर्ष 2014 से 2019 तक राज्य के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए उन्होंने कई बार आदिवासी परंपराओं के संरक्षण की बात की है। वे वर्तमान में किसी संवैधानिक पद पर नहीं हैं, परंतु सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी सक्रियता बनी हुई है।
रघुवर दास ने सरकार से आग्रह किया कि ग्राम स्तर पर कार्यरत पहान, मांझी, मानकी-मुंडा जैसे परंपरागत अगुआओं के लिए एक स्थायी नीति बनाई जाए। इससे आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।



