चांडिल डैम विस्थापितों की संवाद यात्रा जारी, 116 गांवों में पहुंचकर सुनी जा रही समस्याएं

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दूसरे चरण के दूसरे दिन छोटा आमड़ा से लेपाटांड़ तक चला अभियान, संवाद यात्रा पूरी होने के बाद आंदोलन की अगली रणनीति होगी तय

ईचागढ़, 08 सितंबर : चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच के बैनर तले विस्थापित गांवों और पुनर्वास स्थलों में चल रही संवाद यात्रा मंगलवार को भी जारी रही। दूसरे चरण के दूसरे दिन मंच की यात्रा ईचागढ़ प्रखंड के छोटा आमड़ा से शुरू होकर बड़ा आमड़ा, हुटुप, नदीसाई, फिरगिवासा, कुंदरीलोंग, बनकाटी पुनर्वास स्थल होते हुए लेपाटांड़ तक पहुंची। इस दौरान मंच के सदस्यों ने विस्थापित परिवारों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं और लंबित अधिकारों की जानकारी ली।

मंच की ओर से बताया गया कि संवाद यात्रा 7 से 12 सितंबर तक 116 विस्थापित गांवों और 13 पुनर्वास स्थलों में आयोजित की जा रही है। यात्रा का उद्देश्य विस्थापित परिवारों की वर्तमान स्थिति, पुनर्वास, मुआवजा, लंबित अधिकारों समेत वर्षों से चली आ रही विस्थापन की समस्याओं को समझना और सामूहिक रूप से आगे की रणनीति तैयार करना है।

मंच के सदस्य राकेश रंजन महतो, श्यामल मार्डी और अंबिका यादव ने संयुक्त रूप से कहा कि यह अभियान केवल गांव-गांव जाकर समस्याएं सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि विस्थापित समाज को एकजुट कर निर्णायक संघर्ष की जमीन तैयार करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि चांडिल डैम के विस्थापित वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकारों की ओर से समय-समय पर घोषणाएं हुईं, लेकिन कई मूल समस्याओं का स्थायी समाधान अब तक धरातल पर नहीं उतर सका है।

घोषणा नहीं, जमीन पर चाहिए विस्थापन आयोग

मंच ने सरकार से विस्थापन आयोग की घोषणा को तत्काल प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की। सदस्यों ने कहा कि केवल आयोग की घोषणा पर्याप्त नहीं है। आयोग का गठन, अधिकार, कार्यप्रणाली और आवश्यक संसाधन स्पष्ट करते हुए उसे जमीन पर सक्रिय किया जाना चाहिए, ताकि विस्थापितों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो सके।

मंच ने कहा कि विस्थापन आयोग को पर्याप्त अधिकार और संसाधन उपलब्ध कराकर लंबित मामलों के निपटारे की ठोस व्यवस्था की जानी चाहिए।

संवाद यात्रा के बाद तय होगी आंदोलन की अगली रणनीति

मंच के अनुसार, 7 से 12 सितंबर तक सभी 116 गांवों और 13 पुनर्वास स्थलों में संवाद यात्रा पूरी होने के बाद सामूहिक बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में गांवों से सामने आई समस्याओं, सुझावों और जनभावनाओं की समीक्षा कर आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।

मंच ने स्पष्ट किया कि संवाद यात्रा किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ अभियान नहीं है। इसका उद्देश्य विस्थापित समाज की समस्याओं को एक मंच पर लाना, गांवों के बीच समन्वय मजबूत करना और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाते हुए सामूहिक संघर्ष की दिशा तय करना है।

मंच ने कहा कि अब विस्थापित परिवार केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अपने अधिकार, सम्मान और न्याय के लिए ठोस पहल चाहते हैं। यदि सरकार विस्थापन आयोग और लंबित समस्याओं को लेकर गंभीर कदम नहीं उठाती है, तो संवाद यात्रा के बाद विस्थापित समाज की सामूहिक राय के आधार पर आंदोलन को और व्यापक एवं प्रभावी रूप दिया जाएगा।

संवाद यात्रा में अंबिका यादव, श्यामल मार्डी, राकेश रंजन महतो, सागर महतो, अंजित किस्कू, मनोहर महतो, हरेकृष्ण महतो, अनिल मुर्मू, रेंघू हेंब्रम समेत बड़ी संख्या में विस्थापित परिवारों के सदस्य मौजूद रहे।

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