कांड्रा थाना क्षेत्र का मामला : एसपी के निर्देश पर ग्रामीणों के घेरे से पत्रकार सुरक्षित मुक्त, चार लोग अब भी बंधक

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कांड्रा थाना क्षेत्र का मामला : एसपी के निर्देश पर ग्रामीणों के घेरे से पत्रकार सुरक्षित मुक्त, चार लोग अब भी बंधक

सरायकेला, 24 अगस्त : जिले के कांड्रा थाना क्षेत्र के सुदूरवर्ती हुदू पंचायत के ऊपरबेड़ा गांव में जमीन विवाद को लेकर उत्पन्न तनाव के बीच पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्रामीणों के घेरे में फंसे पत्रकार विपिन वार्ष्णेय को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अभिनव भारद्वाज के नेतृत्व में विशेष पुलिस बल गांव पहुंचा और बातचीत एवं सुरक्षा व्यवस्था के बीच पत्रकार को वहां से सुरक्षित निकाला गया। पत्रकार के सकुशल बाहर निकलने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली।

हालांकि, तुमसा सरकारी स्कूल मैदान में कथित तौर पर बंधक बनाए गए एक ही परिवार के चार सदस्य भृगु राम सरदार, जटल सरदार, हबलू सरदार और करुणा सरदारिन की रिहाई अब भी नहीं हो सकी है। ग्रामीण उन्हें फिलहाल छोड़ने के लिए तैयार नहीं बताए जा रहे हैं। पुलिस की टीम ग्रामीणों से लगातार बातचीत कर रही है, ताकि बिना किसी टकराव के चारों को सुरक्षित मुक्त कराया जा सके।

जमीन विवाद ने लिया तनावपूर्ण रूप

बताया जाता है कि गांव में जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। इसी विवाद को लेकर सोमवार को स्थिति उस समय गंभीर हो गई, जब कांड्रा थाना प्रभारी विनोद मुर्मू पुलिस बल के साथ मामले की जानकारी लेने गांव पहुंचे। उनके साथ मामले की कवरेज के लिए पत्रकार विपिन वार्ष्णेय भी मौजूद थे। इसी दौरान ग्रामीणों ने पुलिस टीम और पत्रकार को घेर लिया। स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलने के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया।

एसपी के निर्देश के बाद अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर भेजा गया। एसडीपीओ के नेतृत्व में पहुंची विशेष टीम ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए पत्रकार को ग्रामीणों के घेरे से बाहर निकाला। पत्रकार के सुरक्षित निकलने के बाद भी गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप

ग्रामीणों के बीच से सुरक्षित निकलने के बाद पत्रकार विपिन वार्ष्णेय ने ग्रामीणों की ओर से लगाए जा रहे आरोपों की जानकारी दी। ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित परिवार द्वारा लंबे समय से उन्हें परेशान किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि परिवार खुद को जमींदार बताकर जमीन पर कब्जा करने का प्रयास करता है। इसके अलावा ग्रामीणों को गांव के तालाब में स्नान करने से रोकने और कथित रूप से झूठे मुकदमों में फंसाकर परेशान करने के भी आरोप लगाए गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कार्तिक सरदार उनके सामने नहीं आता, तब तक चारों बंधकों को मुक्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

दूसरे पक्ष ने भी रखी अपनी बात

वहीं दूसरी ओर कार्तिक सरदार ने ग्रामीणों के आरोपों को लेकर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि उसके पूर्वजों ने माझी परिवार को गांव में बसने के लिए जमीन उपलब्ध कराई थी। उसका आरोप है कि समय के साथ उनकी जमीन पर धीरे-धीरे कब्जा किया जा रहा है।

कार्तिक सरदार ने अपने परिवार के साथ मारपीट, घर एवं मंदिरों में तोड़फोड़ तथा उसकी बहन के साथ छेड़खानी जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

चार लोगों की सुरक्षित रिहाई बनी चुनौती

पत्रकार को सुरक्षित निकाल लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती चारों कथित बंधकों को सुरक्षित मुक्त कराना है। पुलिस ग्रामीणों के साथ लगातार संवाद कर रही है और कोशिश की जा रही है कि मामला किसी टकराव की स्थिति में न पहुंचे।

फिलहाल जमीन विवाद ने पूरे गांव का माहौल तनावपूर्ण बना दिया है। पुलिस दोनों पक्षों के आरोपों की जांच के साथ-साथ चारों लोगों की सुरक्षित रिहाई को प्राथमिकता दे रही है। आने वाले समय में पुलिस की बातचीत से गतिरोध टूटता है या फिर कानून के तहत कोई कड़ा कदम उठाना पड़ता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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