सावन की अंतिम सोमवारी पर भक्तिमय हुआ मंदिर परिसर, पांच दशक से जारी है सेवा और श्रद्धा की परंपरा
सरायकेला, 24 अगस्त : पवित्र सावन माह की अंतिम सोमवारी के अवसर पर सरायकेला के प्राचीन कुदरसाईं शिव मंदिर में आयोजित होने वाले विशाल भंडारे ने इस वर्ष अपनी गौरवशाली यात्रा के 50 वर्ष पूरे कर लिए। स्वर्णिम वर्षगांठ के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। भगवान भोलेनाथ के दर्शन और पूजा के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इसके बाद बड़ी संख्या में भक्तों ने महाप्रसाद ग्रहण किया। पूरे मंदिर परिसर में दिनभर “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष गूंजते रहे।
बताया गया कि कुदरसाईं शिव मंदिर में विशाल भंडारे की शुरुआत करीब पांच दशक पूर्व स्वर्गीय रामजी लाल अग्रवाल एवं उस समय के धर्मपरायण और सेवाभावी लोगों ने की थी। श्रद्धा, सेवा और जनकल्याण की भावना से शुरू हुई यह परंपरा समय के साथ और मजबूत होती गई। पांच दशक में पीढ़ियां बदलीं, लेकिन भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था और श्रद्धालुओं की सेवा का भाव आज भी उसी उत्साह के साथ कायम है।
इस वर्ष बाबा बुद्धेश्वर भक्त मंडल की ओर से पूरे श्रद्धाभाव और व्यवस्थित तरीके से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। मंडल के सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत किया तथा प्रेम और सेवाभाव के साथ महाप्रसाद परोसा। भंडारे में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के अलावा दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। उन्होंने कहा कि कुदरसाईं शिव मंदिर और यहां की सेवा परंपरा से उनका वर्षों पुराना भावनात्मक जुड़ाव रहा है। वर्ष 1996 से लगातार भगवान भोलेनाथ और मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
उन्होंने कहा कि स्वर्गीय रामजी लाल अग्रवाल और उस समय के धर्मपरायण लोगों ने जिस सेवाभाव से भंडारे की शुरुआत की थी, उसके लिए समाज सदैव उनका ऋणी रहेगा। भंडारे की परंपरा के 50 वर्ष पूरे होना सरायकेला के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने भगवान भोलेनाथ से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने तथा क्षेत्र में भाईचारा कायम रहने की प्रार्थना की।
भंडारे के आयोजन में कैलाश चैतानी, मनोज चौधरी (मेडिकल), संजय अग्रवाल, बरुण साहू, हेमकांत मंडल, प्रहलाद साहू, घटों दास, रिशु दास सहित बाबा बुद्धेश्वर भक्त मंडल के बड़ी संख्या में सदस्य, कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भंडारे को सफल बनाने में मंडल के सदस्यों के साथ स्थानीय नागरिकों और सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। पांच दशकों से चली आ रही यह धार्मिक परंपरा अब केवल पूजा और प्रसाद वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि सरायकेला में आस्था, सेवा, समर्पण, सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे की जीवंत मिसाल बन चुकी है। स्वर्णिम वर्षगांठ के अवसर पर श्रद्धालुओं ने इस परंपरा को आगे भी निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया।




