पेयजल समस्या : बार-बार मोटर जलने, तकनीकी लापरवाही और डेडिकेटेड बिजली आपूर्ति में देरी मनोज कुमार चौधरी ने सचिव को लिखा पत्र

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पेयजल समस्या : बार-बार मोटर जलने, तकनीकी लापरवाही और डेडिकेटेड बिजली आपूर्ति में देरी मनोज कुमार चौधरी ने सचिव को लिखा पत्र

सरायकेला, 31 जुलाई : नगर पंचायत के अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने नगर क्षेत्र की लगातार बाधित हो रही पेयजल आपूर्ति, जलापूर्ति संयंत्र (WTP) में बार-बार मोटर जलने तथा स्थायी समाधान में हो रही देरी को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव को पत्र भेजकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया है।

पत्र में उन्होंने बताया है कि पिछले चार महीनों में WTP की मोटर तीन बार जल चुकी है, जिससे नगरवासियों को बार-बार पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि यदि मोटर की क्षमता अपर्याप्त थी और पूर्व में तकनीकी सर्वे के आधार पर 90 HP मोटर लगाने की अनुशंसा की जा चुकी थी, तो आज तक आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

उन्होंने कहा कि मोटर की सुरक्षा के लिए रिले, ट्रिपिंग सिस्टम एवं अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण लगाने के निर्देश कई बार दिए गए, लेकिन उनका समुचित पालन नहीं हुआ। इससे स्पष्ट है कि WTP के संचालन एवं रखरखाव (Operation & Maintenance) की प्रभावी निगरानी नहीं हो रही है।

मनोज कुमार चौधरी ने यह भी मांग की है कि JUSCO से विद्युत संयोजन अथवा JBVNL से डेडिकेटेड विद्युत लाइन उपलब्ध कराने की लंबित प्रक्रिया को तत्काल पूरा किया जाए, ताकि जलापूर्ति व्यवस्था को स्थायी एवं निर्बाध बनाया जा सके।

उन्होंने सचिव से अनुरोध किया है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, बार-बार मोटर जलने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा 90 HP मोटर एवं सभी आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की स्थापना शीघ्र सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि यदि विभागीय स्तर पर कार्यों के निष्पादन, संवेदक की भूमिका अथवा वित्तीय एवं तकनीकी प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की अनियमितता या मिलीभगत की आशंका है, तो उसकी निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या संवेदक के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाग अपनी कार्यशैली में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता सुनिश्चित करे, क्योंकि ऐसी लापरवाही से सरकार की छवि भी प्रभावित होती है।

इस संबंध में भेजे गए पत्र की प्रतिलिपि मुख्य अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, उपायुक्त सरायकेला-खरसावां, कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल तथा कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत सरायकेला को भी प्रेषित की गई है।

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