सेविका चुनाव के दौरान प्रतिद्वंद्वी दावेदार से मारपीट का आरोप, चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल

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सेविका चुनाव के दौरान प्रतिद्वंद्वी दावेदार से मारपीट का आरोप, चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल

चांडिल, 08 अगस्त : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड अंतर्गत भादुडीह पंचायत के हामसादा गांव में आंगनबाड़ी सेविका चयन के दौरान प्रतिद्वंद्वी दावेदार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। घटना के बाद चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए चयन को रद्द कर नियमानुसार दोबारा प्रक्रिया कराने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, आंगनबाड़ी सेविका पद के चयन के लिए आयोजित प्रक्रिया में प्रकाश मार्डी भी मौजूद थे। प्रकाश मार्डी का आरोप है कि चयन के दौरान पूर्व सेविका के परिवार से जुड़े एक व्यक्ति ने उनके साथ विवाद किया और कथित तौर पर चप्पल से मारपीट की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ गंभीर मारपीट करने के साथ काटने का प्रयास भी किया गया। घटना के बाद मौके पर तनाव की स्थिति उत्पन्न होने की बात सामने आई है।

प्रकाश मार्डी के अनुसार, घटना में पूर्व सेविका के भाई राजेश बेसरा का नाम सामने आया है। उनका दावा है कि उन्हें पहले भी सेविका पद की उम्मीदवारी से पीछे हटने के लिए दबाव दिया गया था। उन्होंने आशंका जताई है कि भविष्य में भी उनके साथ दोबारा मारपीट की जा सकती है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि समाचार लिखे जाने तक नहीं हो सकी है।

पत्नी थी सेविका पद की दावेदार

बताया गया कि प्रकाश मार्डी की पत्नी तुलसी हांसदा आंगनबाड़ी सेविका पद की अभ्यर्थी हैं और उन्होंने स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई की है। आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान प्रतिद्वंद्वी दावेदारी को लेकर विवाद बढ़ा और इसी दौरान मारपीट की घटना हुई।

घटना के बाद ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि किसी अभ्यर्थी के पक्ष से जुड़े व्यक्ति को कथित रूप से मारपीट कर चयन स्थल से हटाने की स्थिति बनती है, तो ऐसे माहौल में निष्पक्ष चयन प्रक्रिया कैसे सुनिश्चित होगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी सेविका का चयन पारदर्शी और नियमों के तहत होना चाहिए। किसी अभ्यर्थी को डराने, दबाव बनाने या विवाद के जरिए चयन प्रक्रिया से प्रभावित करने की कोशिश होती है तो इससे पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा होता है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि हामसादा गांव में हुई चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में प्रक्रिया प्रभावित होने की पुष्टि होती है तो चयन को निरस्त कर सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर देते हुए दोबारा चयन कराया जाए।

सीडीपीओ की कार्यशैली पर भी सवाल

मामले को लेकर ग्रामीणों ने संबंधित सीडीपीओ की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में आंगनबाड़ी सेविका चयन को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ ग्रामीणों ने चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए हैं।

हालांकि, भ्रष्टाचार अथवा घूसखोरी से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने इन आरोपों की भी जांच कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण व्यवस्था का हिस्सा हैं। ऐसे में सेविका के चयन में किसी भी प्रकार का विवाद या अनियमितता होने पर उसका असर सीधे केंद्र की कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है।

ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि संबंधित सीडीपीओ के लंबे समय से पदस्थ रहने को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। ग्रामीणों ने आंगनबाड़ी सेविका चयन से संबंधित पूर्व की शिकायतों की समीक्षा और जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी चयन प्रक्रिया में आर्थिक लेन-देन, दबाव या पक्षपात के आरोप सामने आते हैं तो प्रशासन को केवल मौजूदा विवाद तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूर्व में हुए चयन की भी जांच करनी चाहिए।

पुलिस और विभागीय बयान का इंतजार

मामले में कथित मारपीट को लेकर पुलिस अथवा महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में मारपीट, चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने, भ्रष्टाचार अथवा अन्य लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और यदि चयन प्रक्रिया प्रभावित होने की पुष्टि होती है तो उसे निरस्त कर पारदर्शी तरीके से दोबारा चयन प्रक्रिया पूरी कराई जाए।

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