चांडिल-कांड्रा मार्ग पर बवाल, स्लैग डालकर गड्ढा भरने का ग्रामीणों ने किया विरोध
चांडिल, 30 जुलाई: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल-कांड्रा मुख्य मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। वर्षों से जर्जर सड़क की मरम्मत की मांग कर रहे ग्रामीणों ने गुरुवार को सड़क के गड्ढों में स्लैग डालकर समतलीकरण किए जाने का विरोध करते हुए काम रुकवा दिया।
चांडिल-कांड्रा मार्ग को जिले की लाइफलाइन माना जाता है। चांडिल, नीमडीह व कुकडू प्रखंड के हजारों लोग जिला मुख्यालय आने-जाने के लिए इसी सड़क का उपयोग करते हैं। लेकिन सड़क की जर्जर हालत के कारण लोगों को हर दिन जोखिम उठाकर सफर करना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में बड़े-बड़े गड्ढों और जलजमाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
जानकारी के अनुसार, इस सड़क की मरम्मत के लिए पहले करीब आठ करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, लेकिन कार्य पूरा नहीं हो सका। बाद में पुनः री-एस्टिमेट तैयार कर करीब नौ करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। इसके बावजूद अब तक सड़क की स्थायी मरम्मत शुरू नहीं हो सकी।
गुरुवार को सड़क के गड्ढों को भरने के लिए स्लैग लाया गया और जेसीबी मशीन से समतलीकरण का कार्य शुरू किया गया। इसकी सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और कार्य का विरोध करते हुए काम बंद करा दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि नौ करोड़ रुपये की स्वीकृति केवल स्लैग डालकर गड्ढे भरने के लिए नहीं दी गई है, बल्कि सड़क का गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ तरीके से पुनर्निर्माण करने के लिए राशि स्वीकृत हुई है। उन्होंने मांग की कि विभाग स्वीकृत एस्टिमेट के अनुसार उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री से सड़क की मरम्मत कराए।
स्थानीय मुखिया सुबोधनी माहली ने कहा कि किसी भी कीमत पर सड़क पर स्लैग या धूल-डस्ट डालने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों से सड़क मरम्मत की मांग की जा रही है, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने केवल आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इसी मार्ग पर प्रखंड मुख्यालय, स्कूल और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय हैं। लोग जिला मुख्यालय, अनुमंडल मुख्यालय और न्यायालय भी इसी सड़क से आते-जाते हैं। सड़क पर कीचड़, धूल और गड्ढों के कारण सबसे अधिक परेशानी बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है।