मानसून में चरमराई बिजली व्यवस्था, चांडिल अनुमंडल के ग्रामीण अंधेरे में – हाथियों का बढ़ा खतरा

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मानसून में चरमराई बिजली व्यवस्था, चांडिल अनुमंडल के ग्रामीण अंधेरे में – हाथियों का बढ़ा खतरा

चांडिल, 4 जुलाई : मानसून की शुरुआत के साथ ही चांडिल अनुमंडल के सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। प्रतिदिन किसी न किसी गांव में बिजली बाधित रहने से हजारों उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार हो रही कटौती और लंबे समय तक आपूर्ति ठप रहने से ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग द्वारा समय रहते बिजली के खंभों, तारों और ट्रांसफार्मरों का नियमित निरीक्षण व रखरखाव नहीं किए जाने के कारण हर वर्ष मानसून के दौरान ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है। हल्की बारिश और तेज हवा के बाद भी कई क्षेत्रों में घंटों, बल्कि कई बार दिनों तक बिजली आपूर्ति बाधित रहती है।

नीमडीह प्रखंड के सीमा फीडर क्षेत्र में 11 हजार वोल्ट का तार टूट जाने से किशुनडीह, भाकुरगाढ़ा और जोनारगोड़ा में पिछले दो दिनों से बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप है। इससे ग्रामीण अंधेरे में रहने को मजबूर हैं और दैनिक कार्यों के साथ पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों ने बताया कि यह क्षेत्र घने जंगलों से सटा हुआ है, जहां जंगली हाथियों का लगातार आवागमन बना रहता है। ऐसे में रात के समय बिजली नहीं रहने से हाथियों का खतरा और बढ़ जाता है। उनका कहना है कि बिजली की रोशनी ही हाथियों के आतंक से बचाव का सबसे बड़ा सहारा होती है। अंधेरा होने पर ग्रामीणों में भय का माहौल बना रहता है।

ग्रामीणों ने बिजली विभाग से मानसून के दौरान आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने, क्षतिग्रस्त तारों की शीघ्र मरम्मत करने तथा नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि लोगों को बार-बार बिजली संकट का सामना न करना पड़े।

इस संबंध में विद्युत विभाग के अधिकारियों का पक्ष लेने हेतु फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।

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