जीत महतो मौत मामले की दोबारा जांच की उठी मांग, नए एसएसपी से निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद
जमशेदपुर, 04 जुलाई : दिसंबर 2025 में गोकुलनगर निवासी जीत महतो की मौत के मामले को लेकर एक बार फिर निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। कुड़मी समाज के वरिष्ठ नेता हरमोहन महतो ने जमशेदपुर के नवनियुक्त एसएसपी से पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पुनः जांच कराने का आग्रह किया है।
हरमोहन महतो ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि दिसंबर 2025 के अंत में मोबाइल चोरी के एक मामले में एमजीएम थाना पुलिस जीत महतो को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई थी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट की गई। बाद में गंभीर हालत में उन्हें एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 31 दिसंबर 2025 को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी।
उन्होंने कहा कि हाल के चर्चित डीडी बार कांड में पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों तक की जवाबदेही तय की, विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया और पूरे मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके विपरीत, जीत महतो मामले में पुलिस हिरासत में प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगने के बावजूद उसी स्तर की कार्रवाई नहीं होने से लोगों के मन में आज भी कई सवाल बने हुए हैं।
हरमोहन महतो ने कहा कि उस समय एमजीएम थाना की भूमिका और पूरे मामले की जांच प्रक्रिया पर लगातार प्रश्न उठते रहे। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की पुलिस हिरासत के बाद मौत होती है तो ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। केवल विभागीय जांच से आम जनता का विश्वास पूरी तरह बहाल नहीं हो सकता।
उन्होंने नवनियुक्त एसएसपी से मामले की सभी पहलुओं से पुनः समीक्षा कराने तथा जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या दोष सामने आता है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की।
हरमोहन महतो ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी व्यक्ति, अधिकारी या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि समान न्याय की भावना के तहत है। उन्होंने कहा कि कानून की नजर में सभी नागरिक बराबर हैं, इसलिए न्याय का पैमाना भी सभी के लिए समान होना चाहिए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि नए एसएसपी जीत महतो मौत मामले की निष्पक्ष पुनः जांच कराकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस पहल करेंगे। साथ ही कहा कि “न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए। यही कानून के शासन और लोकतंत्र की असली पहचान है।”