शिक्षकों की कमी दूर करना जरूरी, लेकिन छात्राओं का धरना कई सवाल भी छोड़ गया

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शिक्षकों की कमी दूर करना जरूरी, लेकिन छात्राओं का धरना कई सवाल भी छोड़ गया

कुकड़ू, 02 जुलाई : सरायकेला-खरसावां जिले के कुकड़ू प्रखंड स्थित झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय (जेबीएवी) में शिक्षकों की कमी को लेकर छात्राओं द्वारा किया गया धरना-प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है। विद्यालय में लंबे समय से विषयवार शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे छात्राओं में नाराजगी स्वाभाविक है। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम ने एक दूसरा महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या विद्यालयी छात्राओं को इस प्रकार आंदोलन का हिस्सा बनाया जाना उचित है?

छात्राओं का कहना है कि अंग्रेजी, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। उनका आरोप है कि एक अध्याय पूरा कराने में कई महीने लग जाते हैं, जिससे बोर्ड परीक्षा की तैयारी प्रभावित हो रही है। यदि ऐसा है तो यह निश्चित रूप से शिक्षा विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय है और इसका त्वरित समाधान होना चाहिए।

गुरुवार को छात्राओं ने विद्यालय के मुख्य द्वार पर धरना दिया। बाद में स्थानीय विधायक द्वारा तीन दिनों के भीतर शिक्षकों की व्यवस्था कराने का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने आंदोलन समाप्त कर दिया। प्रशासन की ओर से पहुंचे प्रभारी अंचल अधिकारी ने भी छात्राओं की समस्याएं सुनकर संबंधित अधिकारियों तक मामला पहुंचाने का भरोसा दिया।

हालांकि, इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि छात्राओं के आंदोलन के पीछे कहीं बाहरी प्रेरणा या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। इन चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही प्रशासन की ओर से ऐसा कोई बयान सामने आया है। ऐसे में इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। यदि भविष्य में इस प्रकार के तथ्य सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

शिक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि शिक्षकों की कमी का मुद्दा पूरी तरह जायज है, लेकिन ऐसे मामलों में अभिभावकों, विद्यालय प्रबंधन समिति, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को आगे आकर समाधान के लिए पहल करनी चाहिए। विद्यार्थियों को आंदोलन की पहली पंक्ति में खड़ा करना शिक्षा के माहौल पर भी असर डाल सकता है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी कुकड़ू क्षेत्र के एक विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा शिक्षक की मांग को लेकर प्रदर्शन किए जाने की घटना सामने आ चुकी है। लगातार ऐसी घटनाओं ने यह आवश्यकता जरूर महसूस कराई है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान समय पर किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को अपनी मांगों के लिए सड़क पर उतरने की नौबत ही न आए।

कुल मिलाकर, इस पूरे मामले के दो महत्वपूर्ण पक्ष हैं। पहला, विद्यालय में शिक्षकों की कमी को तत्काल दूर किया जाना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर छात्राओं के भविष्य पर पड़ रहा है। दूसरा, यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि छात्र-छात्राएं अपनी समस्याएं रखने के लिए सुरक्षित और संस्थागत माध्यमों का उपयोग करें तथा उन्हें किसी भी परिस्थिति में अनावश्यक विवाद या आंदोलन का माध्यम न बनना पड़े। यही शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों – दोनों के हित में होगा।

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