चांडिल, 17 जून : सरायकेला-खरसावां जिले के कपाली ओपी में आदिवासी युवती के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले में ओपी प्रभारी धीरंजन कुमार समेत तीन पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद अब क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि मामला बेहद गंभीर आरोपों से जुड़ा है, ऐसे में केवल निलंबन की कार्रवाई से न्याय की प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जा सकती।
गौरतलब है कि चांडिल थाना क्षेत्र के कांदरबेड़ा पुनर्वास कॉलोनी निवासी अल्पना माहली ने कपाली पुलिस पर पूछताछ के दौरान मारपीट और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था। मामला सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी ने त्वरित संज्ञान लेते हुए चांडिल एसडीपीओ शिव प्रकाश कुमार को जांच का जिम्मा सौंपा था। जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया कपाली ओपी प्रभारी धीरंजन कुमार, पुलिसकर्मी मोहम्मद मुकलेसुर रहमान तथा महिला पुलिसकर्मी कंचन की भूमिका सामने आने के बाद तीनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
एसपी द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई की स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और आदिवासी समुदाय ने सराहना की है। लोगों का कहना है कि इससे यह संदेश गया है कि पुलिस विभाग शिकायतों को गंभीरता से लेता है और दोषी पाए जाने पर अपने ही कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटता।
हालांकि अब लोगों के बीच यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या निलंबन के बाद मामले की जांच और कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि निलंबन केवल एक प्रारंभिक प्रशासनिक कदम है, जबकि मामले की सच्चाई सामने लाने और न्याय सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
विभिन्न सामाजिक और आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि जांच के दौरान अन्य तथ्य या अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उनका मानना है कि न्याय तभी पूर्ण माना जाएगा जब जांच अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचे और दोषी पाए जाने वालों पर उचित कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई हो।
स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी कहना है कि इस मामले में लोगों की निगाहें पुलिस प्रशासन पर टिकी हुई हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी के नेतृत्व में जांच निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ेगी तथा किसी भी स्तर पर मामले को दबाने का प्रयास नहीं होने दिया जाएगा।
फिलहाल विभागीय जांच जारी है। ऐसे में क्षेत्र के लोग अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि जांच के अंतिम निष्कर्ष क्या सामने आते हैं और उसके आधार पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है। लोगों का मानना है कि यह मामला केवल निलंबन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि न्याय के पायदान पर पूरी तरह खरा उतरने तक इसकी जांच और कार्रवाई जारी रहनी चाहिए।