देवलटांड़ जनगणना विवाद पहुंचा केंद्रीय मंत्री संजय सेठ तक, ग्रामीणों को न्याय दिलाने का दिया आश्वासन

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ईचागढ़, 14 जून : सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड अंतर्गत देवलटांड़ पंचायत में जनगणना के दौरान जाति दर्जीकरण को लेकर उत्पन्न विवाद अब केंद्रीय स्तर तक पहुंच गया है। रविवार को ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री एवं रांची सांसद संजय सेठ को पंचायत के ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया।

ग्रामीणों ने मंत्री को बताया कि जिन परिवारों के खतियान में उनकी जाति संथाल-मांझी दर्ज है तथा जिन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी के तहत मिला है, उनकी जाति जनगणना के दौरान भी संथाल-मांझी के रूप में दर्ज की जानी चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में जिला प्रशासन उनकी बातों पर ध्यान नहीं दे रहा है।

मामले को गंभीर बताते हुए केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने ग्रामीणों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि वे इस विषय को राज्य स्तर के अधिकारियों के समक्ष उठाएंगे। मंत्री ने कहा कि जब खतियान जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में संबंधित परिवारों की जाति दर्ज है और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी उसी आधार पर मिला है, तो जनगणना में अलग स्थिति उत्पन्न होना चिंताजनक है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

इस दौरान सांसद प्रतिनिधि मनोज महतो, दिनेश मांझी, अजित मांझी, सत्यवान मांझी, रूपेश मांझी, गणेश मांझी, बद्री मांझी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

गौरतलब है कि पिछले दिनों देवलटांड़ पंचायत के नावाडीह गांव में जनगणना कार्य के दौरान जाति दर्जीकरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। ग्रामीण जनगणना प्रपत्र में अपनी जाति संथाल-मांझी दर्ज करने की मांग कर रहे थे, जबकि प्रशासन की ओर से जन्म प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने की बात कही गई थी। विवाद के समाधान के लिए ईचागढ़ की प्रखंड विकास पदाधिकारी भी गांव पहुंची थीं, लेकिन कोई सर्वसम्मत समाधान नहीं निकल सका।

बाद में प्रखंड मुख्यालय निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने भी स्पष्ट किया था कि जनगणना के दौरान जाति का निर्धारण करना प्रशासन का कार्य नहीं है, बल्कि पूर्व से उपलब्ध अभिलेखों एवं अद्यतन आंकड़ों के आधार पर जानकारी दर्ज की जाती है। अब मामला केंद्रीय मंत्री संजय सेठ तक पहुंचने के बाद ग्रामीणों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि उनकी मांगों पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

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