पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का निधन, सेना से राजनीति तक अनुशासन और ईमानदारी की मिसाल

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रांची, 19 मई : लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार को निधन हो गया। राजनीति में आने से पहले उन्होंने भारतीय सेना में एक लंबा और गौरवशाली समय बिताया। वे मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। भारतीय सेना में रहते हुए उन्होंने अनुशासन और समयबद्धता का जो पाठ पढ़ा था, इसी अनुशासन और समयबद्धता को उन्होंने अपनी राजनीति और मुख्यमंत्री कार्यकाल में भी लागू किया, जिसके चलते नौकरशाही हमेशा मुस्तैद रहती थी। उनके निधन से राजनीति में शुचिता, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया है।

भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और अपनी ईमानदार कार्यशैली, सादगी व कठोर प्रशासनिक निर्णयों के कारण विशेष पहचान बनाई। उन्होंने अनुशासन और समयबद्धता को अपने राजनीतिक जीवन में भी उतारा। मुख्यमंत्री रहते हुए उनकी प्रशासनिक सख्ती और भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की व्यापक चर्चा रही। वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भी रहे।

भुवन चंद्र खंडूरी ने देश की महत्वाकांक्षी ‘स्वर्ण चतुर्भुज योजना’ को धरातल पर उतारने में अहम भूमिका निभाई थी। सेना एवं जनसेवा के प्रति उनका समर्पण सदैव प्रेरणादायी रहेगा। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक युवा परिषद ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है। परिषद ने कहा कि मेजर जनरल से मुख्यमंत्री तक का उनका सफर देश के युवाओं और पूर्व सैनिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। साथ ही शोक संतप्त परिवार एवं समर्थकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई।

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