


रांची, 19 मई : आदिवासी भूमिज मुंडा चुआड़ सेना, झारखंड का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को झारखंड लोकभवन में राज्यपाल से मुलाकात कर भूमिज समाज की आपत्तियों एवं भावनाओं से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने इस दौरान प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. जगदीश चंद्र झा की पुस्तक “भूमिज रिवॉल्ट” भी राज्यपाल को भेंट की। संगठन ने स्पष्ट किया कि आदिवासी भूमिज समाज रघुनाथ महतो को चुआड़ विद्रोह का महानायक नहीं मानता है तथा इस विषय पर समाज की पुरानी आपत्ति रही है।
प्रतिनिधिमंडल की ओर से मानिक सिंह सरदार ने कहा कि 13 मई 2026 को पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो द्वारा रघुनाथ महतो की प्रतिमा राज्यपाल को भेंट करने तथा लोकभवन में माल्यार्पण करने का कदम दुर्भाग्यपूर्ण एवं भूमिज समाज की भावनाओं को आहत करने वाला है। उन्होंने कहा कि यह मामला सिविल कोर्ट, रांची में विचाराधीन है, ऐसे में सार्वजनिक रूप से प्रतिमा भेंट करना न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी है और इससे समाज में अनावश्यक विवाद उत्पन्न हो सकता है।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि राज्यपाल के साथ हुई वार्ता में उन्हें मौखिक आश्वासन मिला है कि लोकभवन परिसर में प्रतिमा स्थापना को लेकर अब तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है तथा भूमिज समाज की चिंताओं को गंभीरता से सुना गया है। राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में न्यायालय के अंतिम निर्णय तक किसी भी प्रकार की आधिकारिक मान्यता या सार्वजनिक सम्मान पर रोक लगाने, लोकभवन की तटस्थता बनाए रखने तथा समाज के साथ विस्तृत संवाद सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
आदिवासी भूमिज मुंडा चुआड़ सेना ने कहा कि न्यायालय में लंबित विषयों की अनदेखी कर समाज की भावनाओं से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। संगठन ने उम्मीद जताई कि राज्यपाल न्यायिक प्रक्रिया एवं संवैधानिक मर्यादा का सम्मान सुनिश्चित करेंगे। प्रतिनिधिमंडल में मानिक सिंह सरदार, रामू सरदार, निर्मल सरदार, मनिका भूमिज, निवारण सरदार, पार्वती सरदार, सागर सरदार, हरा सरदार एवं विभूती सरदार शामिल थे।

























