जंगली हाथी की समस्या : वन्यजीव-मानव संघर्ष का मामला नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन, सुरक्षा और आजीविका से जुड़ा एक ज्वलंत संकट
मानभूम अपडेट्स, डेस्क :
चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में जंगली हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल के दिनों में लगातार हो रही घटनाओं ने ग्रामीणों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल गहरा कर दिया है। सोमवार को अहले सुबह एक बार फिर ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के कुकड़ु प्रखंड अंतर्गत कुकड़ु निवासी मुनि राम गोराई काे जंगली हाथियों ने कुचलकर मार डाला। वहीं 24 अप्रैल की देर रात ईचागढ़ प्रखंड के हाड़ात में एक मकान पर हमलाकर जंगली हाथियों ने उसे ध्वस्त कर दिया। इस घटना में मकान के अंदर सो रही मां-बेटी की मौत हो गई थी। इसके पूर्व 11 अप्रैल को भी अहले सुबह जंगली हाथियों ने एक व्यक्ति को पटक कर मार डाला था।
खुद बचानी पड़ती है अपनी जान
जंगली हाथियों के हमले में लोगों की दर्दनाक मौत से इलाके को झकझोर कर रख दिया है। पिछले 2-3 वर्षों में चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में दर्जनों निर्दोष ग्रामीण जंगली हाथियों की भेंट चढ़ चुके हैं। बच्चे अनाथ हो रहे हैं, घर टूट रहे हैं, फसलें बर्बाद हो रही हैं। इस बीच वन विभाग वहीं पुराने आश्वासनों को ही दोहरा रही है। लोगों का कहना है कि जंगली हाथियों से ग्रामीणों को खुद अपनी जान बचानी पड़ रही है। ग्रामीण जानना चाह रहे हैं कि विभाग का रेस्क्यू टीम कहां है? ड्रोन और पश्चिम बंगाल की टीम का सिर्फ दिखावा क्यों कर रही है विभाग? सरकारी प्रावधान सिर्फ फाइलों में ही क्यों दबी रह जरती है ? पीड़ित परिवारों को क्यों दर-दर भटकना पड़ता है।
आजीविका से जुड़ा एक ज्वलंत मुद्दा
जंगली हाथी द्वारा किसी को मारे जाने के बाद क्षेत्र के पक्ष व विपक्ष के राजनीतिक दलों के नेता पीड़ित परिवारों को सांत्वना देने पहुंचते हैं। हर संभव सहायता करने का भरोसा देतें हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल सांत्वना, राहत सामग्री और आश्वासन इस गंभीर समस्या का समाधान है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल वन्यजीव-मानव संघर्ष का मामला नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन, सुरक्षा और आजीविका से जुड़ा एक ज्वलंत संकट बन चुका है। जरूरत है ठोस और दीर्घकालिक समाधान की। जब तक स्थाई सामाधान के उपायों पर गंभीरता से काम नहीं किया जाएगा, तब तक संवेदनाएं और सियासत, दोनों ही इस दर्द को कम नहीं कर पाएंगी।
असहनीय हो चुकी है पीड़ा
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों का आतंक अब असहनीय हो चुका है। हर रात डर के साये में गुजरती है। गरीब किसानों के घर उजड़ रहे हैं, फसलें नष्ट हो रही हैं और आए दिन जान-माल का नुकसान हो रहा है। जंगली हाथी समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए ठोस पहल करने की जरूरत है। चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में हाथी कॉरिडोर को अतिक्रमण मुक्त कर सोलर फेंसिंग और वॉच टावर लगाने के साथ क्षेत्र को “हाथी प्रभावित क्षेत्र” घोषित कर स्थायी रेस्क्यू सेंटर और क्विक रिस्पॉन्स टीम तैनात करने की मांग की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथी द्वारा मारे जाने पर मृतक के परिजनों को तत्काल 10 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।