वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों के परिवहन पर सख्ती, शिक्षा के साथ छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना विद्यालयों की जिम्मेदारी

Manbhum Updates
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सरायकेला, 28 अप्रैल : जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की पहली बैठक उपायुक्त की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई। झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के अनुपालन में हुई बैठक में कई मुद्​दों पर चर्चा की गई। मौके पर निजी विद्यालयों द्वारा शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया को पारदर्शी, नियंत्रित एवं न्यायसंगत बनाने, अभिभावकों पर पड़ने वाले अनावश्यक आर्थिक बोझ को कम करने तथा विभिन्न शिकायतों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।

इस क्रम में निर्णय लिया गया कि सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय विद्यालय स्तरीय शुल्क समिति की अनुशंसा पर अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही शुल्क वृद्धि कर सकेंगे तथा इससे अधिक वृद्धि के लिए जिला स्तरीय समिति की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी। यह भी निर्देश दिया गया कि शुल्क वृद्धि न्यूनतम दो वर्षों तक प्रभावी रहेगी तथा विद्यालयों को विगत तीन शैक्षणिक सत्रों एवं सत्र 2026-27 की कक्षावार शुल्क विवरणी जिला समिति को उपलब्ध करानी होगी। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि संचालन समिति की सहमति के उपरांत ही प्रबंधन समिति शुल्क वृद्धि का निर्णय लेगी तथा यह प्रक्रिया राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप होगी।

अभिभावकों के हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह निर्देश दिया गया कि किसी भी विद्यालय द्वारा प्रवेश, पुनः नामांकन या अन्य किसी भी नाम पर अवैध शुल्क की वसूली नहीं की जाएगी तथा शिकायत प्राप्त होने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि विद्यालय अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या विक्रेता से पुस्तक, कॉपी या पोशाक खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेंगे। इसके साथ ही सभी निजी विद्यालयों में शुल्क समिति एवं अभिभावक-शिक्षक संघ का गठन अनिवार्य रूप से करने तथा इसकी जानकारी विद्यालय की वेबसाइट एवं सूचना पट्ट पर देने का निर्देश दिया गया, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

परिवहन एवं छात्र सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपायुक्त ने निर्देश दिया कि विद्यालय वाहनों में निर्धारित सीट क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जाएगा तथा सभी परिवहन एवं सुरक्षा मानकों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही विद्यालयों को बाहरी वाहनों की नियमित निगरानी रखने तथा छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया। बैठक के दौरान उपायुक्त ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया कि सभी निजी विद्यालयों द्वारा विभिन्न मदों में लिए जा रहे शुल्क का विस्तृत ब्रेकअप एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराया जाए, जिससे प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

इसके अतिरिक्त राइट टू एजुकेशन के प्रावधानों के तहत पात्र परिवारों के बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विद्यालयों एवं शैक्षणिक व्यवस्था से संबंधित जारी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने वाले निजी विद्यालयों/संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी प्रकार की लापरवाही या उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन द्वारा सख्त अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं अभिभावकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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