“नशे में बेहोश गौवंश, हाईवे पर मौत का सौदा – चांडिल में बेनकाब हुआ तस्करी का संगठित खेल”

MANBHUM UPDATES
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चांडिल, 15 अप्रैल: सरायकेला-खरसावां जिले के चिलगु स्थित टाटा–रांची नेशनल हाईवे पर मंगलवार रात हुआ एक सड़क हादसा सिर्फ दुर्घटना नहीं, बल्कि गैर-कानूनी गौ तस्करी के संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश साबित हुआ। चांडिल थाना क्षेत्र के शहरबेड़ा के पास वैगनआर कार और एक संदिग्ध वैन की सीधी टक्कर ने उस काले कारोबार की परतें खोल दीं, जो लंबे समय से प्रशासन और समाज की आंखों में धूल झोंककर चलाया जा रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चांडिल की ओर से जमशेदपुर की ओर जा रही वैन और विपरीत दिशा से आ रही कार में रात करीब 11 बजे आमने-सामने की भिड़ंत हुई। टक्कर के बाद वैन चालक और उसमें सवार लोग मौके से फरार हो गए, मानो उन्हें अपने अपराध का अंदेशा पहले से हो। लेकिन असली सच्चाई तब सामने आई, जब स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे। वैन का दरवाजा खुलते ही जो दृश्य सामने आया, वह न सिर्फ अमानवीय था बल्कि दिल दहला देने वाला भी था।

दर्जनों गायों को ठूंस-ठूंस कर भरा गया था, कई घायल, कई बेसुध और अधिकांश ऐसी हालत में थीं कि खड़े तक नहीं हो पा रही थीं। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए सभी गायों को बाहर निकाला और सड़क किनारे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसी दौरान यह सवाल उठने लगा कि इतनी गंभीर हालत और भीड़भाड़ के बावजूद एक भी गाय ने न आवाज की, न ही कोई हलचल, क्या इन्हें नशीला इंजेक्शन देकर बेसुध किया गया था?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि गौ तस्कर अक्सर इसी तरीके का इस्तेमाल करते हैं, ताकि परिवहन के दौरान किसी को भनक तक न लगे। यदि यह सच है, तो यह केवल तस्करी नहीं, बल्कि क्रूरता की पराकाष्ठा है। घटना की सूचना मिलते ही चांडिल पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों वाहनों को जब्त कर लिया। पाटा टोल प्लाजा से क्रेन मंगाकर क्षतिग्रस्त गाड़ियों को हटाया गया और यातायात सामान्य किया गया। पुलिस ने सभी गायों को भी कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

इस बीच, कुछ संदिग्ध लोग भी मौके पर पहुंचे, जो खुद को अलग-अलग रूप में प्रस्तुत कर गायों को अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन ग्रामीणों की सतर्कता के आगे उनकी एक न चली। लोगों ने पुलिस पर दबाव बनाते हुए साफ कहा “गायों को किसी भी हालत में सुरक्षित रखा जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।” यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है क्या हाईवे पर सक्रिय यह नेटवर्क प्रशासन की नजरों से सचमुच ओझल है, या कहीं न कहीं लापरवाही की भी भूमिका है?

क्या नशीले पदार्थों का इस्तेमाल कर गौवंश को इस तरह यातनाएं देना अब तस्करी का नया ट्रेंड बन चुका है? फिलहाल, चांडिल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। लेकिन इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गौ तस्करी अब छोटे-मोटे अपराध की श्रेणी में नहीं, बल्कि एक संगठित और खतरनाक तंत्र के रूप में सामने आ चुकी है, जिसे जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कार्रवाई और निरंतर निगरानी बेहद जरूरी है।

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