चांडिल, 10 अप्रैल : हाथों में तख्तियां लिए छोटे-छोटे बच्चे सड़क पर उतरकर अपना भविष्य सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं, वहीं गांव के पुरुष और महिलाएं स्वस्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकुल असर का विरोध जता रहे थे। जी, हां शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे से टुईडुंगरी गांव के बच्चे, वयस्क और महिलाएं सड़क पर अपना डेरा जमाए हुए हैं। सभी गांव में स्थापित स्पंज आयरन पुैक्ट्री से फैल रही विनाशकारी प्रदूषण काे रोकने की मांग कर रहे थे। जानलेवा प्रदूषण के विरोध में सभी घर से निकल कर सड़क पर डेरा जमा लिए हैं। इस संबंध में विरोध-प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि कंपनी प्रबंधन से बार-बार आग्रह करने के बाद भी जब कंपनी से उड़ाए जा रहे काले धूलकणों पर रोक नहीं लगाया गया तो ग्रामीण इसके खिलाफ सुबह से गांव की सड़क पर पूरे परिवार के साथ बैठ गए।
स्पंज आयरन फैक्ट्री के विनाशकारी प्रदूषण से त्रस्त ग्रामीणों ने चारों ओर से निराशा हाथ लगने के बाद स्वयं आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया और शुक्रवार को सड़क जामकर उग्र प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान ग्रामीण सड़क जामकर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। फैक्ट्री परिसर में प्रदूषण नियंत्रण यंत्र या तो बंद रहते हैं या सही ढंग से संचालित नहीं किए जाते, जिसके कारण काले धूलकण लगातार हवा में फैल रहे हैं। इसका सीधा असर गांव के लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि गांव में खांसी, सांस संबंधी बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। “हर समय हवा में काला धुआं और धूल उड़ती रहती है, जिससे जीना दूभर हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी के प्रदूषण का असर खेती-बाड़ी पर भी पड़ रहा है। खेतों में उगाई गई सब्जियों पर काली परत जम जा रही है, जिससे वे खाने योग्य नहीं रह जाती हैं। इतना ही नहीं, गांव के कुओं और तालाबों का पानी भी प्रदूषित हो चुका है। पानी के ऊपर काली परत जम जाता है, जिससे इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों के जीवन पर भी खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि “कंपनी हमारे जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है और आने वाली पीढ़ी का भविष्य बर्बाद कर रही है।” ग्रामीणों ने अपनी मांगों के समर्थन में ग्रामीण सड़ को अवरुद्ध कर कंपनी के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों ने बताया कि ग्रामीण सड़क का उपयोग कंपनी अपने व्यावसायिक कार्यों के लिए करती है।
पीड़ित ग्रामीणों ने बताया कि कंपनी प्रबंधन का मनोबल इतन बढ़ गया है कि दोपहर तक सड़क पर बैठे ग्रामीणों के साथ वार्ता करने के लिए कंपनी प्रबंधन की ओर से कोई नहीं पहुंचा, इससे ग्रामीण और अधिक उग्र हो गए। ग्रामीणों को और अधिक उग्र होता देखकर कंपनी का एचआर विनोद सिंह चौका थाना प्रभारी और पुलिस बल के साथ जामस्थल पर पहुंचे। ग्रामीणों की मांग पर कंपनी के एचआर ने सोमवार को कंपनी के मालिक के आने की जानकारी देते हुए उस दिन सभी मामलों पर वार्ता होने की बात कही। ग्रामीणा इससे संतुष्ट नहीं हुए। वहीं मौके पर कंपनी के एचआर और थाना प्रभारी के लिखित आश्वासन के बाद ग्रामीण सड़क जाम हटाने पर राजी हुए। सुबह करीब आठ बजे से शुरू सड़क जाम दिन के करीब तीन बजे समाप्त हुआ।