चांडिल, 02 अप्रैल : विस्थापित मुक्ति वाहिनी ने सुवर्णरेखा परियोजना द्वारा पुनर्वास हक को शिथिल करने की मनोवृति का विरोध किया है। गुरुवार को चांडिल डैम नौका विहार स्थल पर हुई विमुवा की बैठक में पर्यटन को कॉरपोरेट परस्त बनाने के विरुद्ध संघर्ष का संकल्प लिया गया। 30 अप्रैल 2026 को जयदा शहादत दिवस के अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के पश्चात एक जत्था पदयात्रा कर चांडिल बांध तक आएगी और अधिकारियों को अपनी लंबित मांगों और भविष्य के इरादों से अवगत कराएगी।
विमुवा ने कहा कि गत दिनों चांडिल बांध में पर्यटन का अधिकार गैर विस्थापित एजेंसी को सौंप दिया गया है। भारत सरकार पर्यटन क्षेत्र को सरकारी खर्चे पर विकसित कर उसे कॉर्पोरेट – खासतौर पर गुजरात के कुछ चुनिंदे व्यापारियों के हवाले कर देने की योजना पर कार्यरत है। इसी उद्देश्य से स्वदेश दर्शन 2.0 नाम की एक एजेंसी पीपीपी मॉडल पर विस्तृत योजना बना रही है। इसका विमुवा पुरजोर विरोध करती है। विमुवा का मनना है कि चांडिल डैम से रोजगारोन्मुखी योजनाएं विस्थापितों को ही निशुल्क दी जाए।
विस्थापितों के पुनर्वास हक को कायम रखने और प्राप्त करने के उद्देश्य से बिरसा मुंडा शहादत दिवस के अवसर पर चांडिल स्थित स्वर्णखा परियोजना के कार्यालय के सामने धरना दिया जाएगा। विमुवा के नेतृत्व में चले पुनर्वास आंदोलन का आगामी वर्ष 2027 में 40 वर्ष पूरा हो जाएगा। बैठक में यह तय किया गया कि पुनर्वास आंदोलन की उपलब्धियां को यादगार बनाने और समाज में संघर्ष और निर्माण की प्रेरणा जगाने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बैठक में कहा गया कि जिन अधिकारों को हमने संघर्ष के बल पर हासिल किया है उसे संघर्ष के जरिए ही बचाए जा सकता है।
बताया गया कि कार्यक्रमों की योजना बनाने के लिए शीघ्र ही कार्यकर्ताओं की एक बैठक आयोजित की जाएगी। विमुवा विस्थापितों को कृतज्ञता पैकेज, लिफ्ट इरिगेशन एवं डीप बोरिंग की स्थापना, पुनर्वास स्थलों का सीमांकन और स्टेटस रिपोर्ट, विस्थापित परिवार के बच्चों के लिए मॉडल आवासीय विद्यालय, चांडिल पॉलिटेक्निक में विस्थापित बच्चों के लिए 50 प्रतिशत स्थान सुरक्षित रखना, पालना जलाशय योजना को पूरा करने समेत कई मांग की जाएगी।