बाल विवाह व डायन प्रथा के विरुद्ध सामूहिक संकल्प, सरायकेला में अनुमंडल स्तरीय कार्यशाला आयोजित

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बाल विवाह व डायन प्रथा के विरुद्ध सामूहिक संकल्प, सरायकेला में अनुमंडल स्तरीय कार्यशाला आयोजित

सरायकेला, 06 जनवरी : सामाजिक कुरीति निवारण योजना के अंतर्गत संचालित “हमारा संकल्प – सुरक्षित एवं सशक्त महिला, सशक्त झारखंड” कार्यक्रम के तहत मंगलवार को नगर भवन, सरायकेला में बाल विवाह मुक्त झारखंड एवं डायन प्रथा उन्मूलन विषय पर अनुमंडल स्तरीय एकदिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त कुप्रथाओं के खिलाफ जन-जागरूकता बढ़ाना, विधिक प्रावधानों की जानकारी देना तथा महिलाओं व बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा हेतु सामूहिक प्रयासों को मजबूत करना रहा।

कार्यक्रम के दौरान बाल विवाह मुक्त झारखंड विषय पर आधारित एक जागरूकता डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसमें बाल विवाह के सामाजिक, शैक्षणिक एवं स्वास्थ्यगत दुष्परिणामों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रतिभागियों को अपने आसपास होने वाले बाल विवाह के मामलों पर सजग रहने तथा समय रहते प्रशासन को सूचना देने के लिए प्रेरित किया गया।

प्रशिक्षण सत्रों में बाल विवाह एवं डायन प्रथा से संबंधित कानूनी प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही महिलाओं एवं छात्राओं के लिए संचालित सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।

इस अवसर पर जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने उपस्थित प्रतिभागियों को बाल विवाह, दहेज एवं डायन प्रथा उन्मूलन की शपथ दिलाई। सभी ने अपने परिवार, पड़ोस और समाज में इन सामाजिक कुरीतियों को रोकने तथा किसी भी घटना की सूचना प्रशासन को देने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा ने कहा कि बाल विवाह मुक्त झारखंड के लिए कानूनों का सख्ती से पालन और निरंतर सामाजिक जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बेटियों को समान शिक्षा, महिलाओं के सशक्तिकरण और “न दहेज लेंगे, न दहेज देंगे” के सामूहिक संकल्प पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की समान भागीदारी से ही समाज, राज्य और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।

उप विकास आयुक्त ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा और जागरूकता के अभाव में ही सामाजिक कुरीतियाँ पनपती हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा महिलाओं एवं बालिकाओं के संरक्षण और सशक्तिकरण हेतु कई योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ पात्र वर्ग को अवश्य लेना चाहिए। उन्होंने अपील की कि बाल विवाह या डायन प्रथा से जुड़ी किसी भी जानकारी को छिपाने के बजाय पंचायत, प्रखंड कार्यालय, प्रशासन या टोल फ्री हेल्पलाइन 181 पर तत्काल सूचना दें।

कार्यक्रम में पद्मश्री छुटनी महतो की गरिमामयी उपस्थिति विशेष आकर्षण रही। उन्होंने डायन प्रथा के विरुद्ध अपने संघर्ष और अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे सामाजिक जागरूकता से अनेक महिलाओं को इस अमानवीय कुप्रथा से बचाया गया। उनके वक्तव्य ने उपस्थित लोगों को निर्भीक होकर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा दी।

कार्यशाला में जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, सामाजिक सुरक्षा निदेशालय के प्रतिनिधि, सभी सीडीपीओ, महिला पर्यवेक्षक, सेविका सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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