ससेक्स विश्वविद्यालय में झामुमो की जल–जंगल–जमीन की लड़ाई पर व्याख्यान, शिबू सोरेन की जीवनी पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर हुई चर्चा

जमशेदपुर, 22 नवंबर : झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने ब्रिटेन के प्रतिष्ठित ससेक्स विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ वर्ल्ड एनवायरनमेंट हिस्ट्री के आमंत्रण पर “झारखंड की जल–जंगल–जमीन की लड़ाई और शिबू सोरेन की जीवनी” विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। लंदन के निकट ससेक्स स्थित विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने पारंपरिक “जोहार” के साथ की।
कुणाल ने अपने संबोधन में झारखंड के 150 वर्ष लंबे संघर्ष की ऐतिहासिक यात्रा का विस्तार से उल्लेख किया। सिद्धो–कान्हो, बिरसा मुंडा जैसे महानायकों से लेकर आधुनिक काल तक चले आंदोलन को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि ब्रिटिश शासन के खिलाफ पहली निर्णायक आवाज़ 1757 में भोगनाडीह से उठी थी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झारखंडी आदिवासी आंदोलनों और अलग राज्य की लड़ाई पर चर्चा सीमित रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने स्वतंत्रता के बाद आदिवासी राजनीति और अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा देने वाले महान नेताओं जयपाल सिंह मुंडा और शिबू सोरेन के योगदान का भी उल्लेख किया। कुणाल ने कहा कि महाजनी प्रथा के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने वाले गुरूजी (शिबू सोरेन) आदिवासी हितों के सबसे सशक्त चेहरे रहे हैं। उनके अनुसार, न्यायालय द्वारा सभी आरोपों से मुक्त होने के बावजूद राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें वह स्थान नहीं मिला जिसके वे हकदार हैं।
कुणाल ने झामुमो की स्थापना के पीछे शिबू सोरेन, विनोद बिहारी महतो और ए.के. रॉय की सोच का उल्लेख करते हुए कहा कि आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उसी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि “मारांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा छात्रवृत्ति” के माध्यम से झारखंडी विद्यार्थी ब्रिटेन के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ससेक्स विश्वविद्यालय में पढ़ रही रांची की त्रिनिशा और खूंटी की उषा से भी मुलाकात की, जिन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
कुणाल ने विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय उप–प्रो वीसी सिमोन थॉम्पसन, निदेशक डॉ. वीनिता दामोदरन और संयोजक प्रो. सौम्या नाथ को धन्यवाद देते हुए कहा कि झामुमो के आंदोलन और शिबू सोरेन की प्रेरक जीवनी को अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच पर स्थान देना झारखंड के लिए गौरव की बात है।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि आने वाले दिनों में ससेक्स विश्वविद्यालय और झारखंड के शैक्षणिक संस्थानों के बीच एक्सचेंज प्रोग्राम और अन्य शैक्षणिक साझेदारियाँ विकसित होंगी। विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों का एक दल अगले वर्ष जनवरी में रांची आएगा और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस सहयोग को आगे बढ़ाएगा।



