ईचागढ़ में अवैध बालू कारोबार पर नए सवाल: JLKM नेता जेल भेजे गए, अब थाना प्रभारी की भूमिका पर भी उठ रहे प्रश्न

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ईचागढ़ में अवैध बालू कारोबार पर नए सवाल: JLKM नेता जेल भेजे गए, अब थाना प्रभारी की भूमिका पर भी उठ रहे प्रश्न

ईचागढ़, 20 नवंबर: सरायकेला–खरसावां जिले का ईचागढ़ थाना एक बार फिर विवादों में है। बीती रात बालू लदे वाहनों को रोककर रंगदारी वसूलने और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट के आरोप में JLKM नेता तरुण महतो को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। तरुण महतो द्वारा वाहनों को रोकना और पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई करना स्पष्ट रूप से कानून के विरुद्ध है। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई त्वरित और स्पष्ट रही।

लेकिन गिरफ्तारी के बाद अब एक बड़ा सवाल उभरकर सामने आया है—क्या इस पूरे प्रकरण में थाना प्रभारी और पुलिस बल की भूमिका की भी जांच होगी?

 

थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप, सवालों के घेरे में पुलिस की कार्रवाई

स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटना के दौरान आरक्षी नरेश यादव देर रात थाना से दूर बालू लदे वाहनों के बीच मौजूद थे। यह भी चर्चा है कि वे थाना प्रभारी के निर्देश पर वाहनों की गिनती कर रहे थे। यदि यह सच है, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि— एक आरक्षी को आधी रात बालू वाहनों के बीच भेजने की क्या आवश्यकता थी? वह किस आधिकारिक ड्यूटी पर थे?क्या यह अवैध खनन या परिवहन की मौन निगरानी से जुड़ा मामला था?

 

पुलिस पर प्रति ट्रिप आठ हजार रुपये वसूली का आरोप भी लंबे समय से चर्चा में है। अब इस घटना के बाद यह आरोप फिर से सुर्खियों में आ गया है। लोगों का सवाल है कि यदि वसूली होती है, तो इस रकम में किस–किस के हाथ रंगे हैं?

 

खनन विभाग की लगातार कार्रवाई और बड़ा खुलासा

जिला खनन पदाधिकारी एवं खान निरीक्षक समय–समय पर ईचागढ़ क्षेत्र में अवैध बालू खनन, परिवहन और भंडारण के विरुद्ध कार्रवाई करते रहे हैं। कई बार की गई छापेमारी में लाखों CFT अवैध बालू भंडारण सीज किया गया है। ट्रैक्टर और हाइवा समेत कई वाहनों को जप्त भी किया गया है। ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि ईचागढ़ में अवैध बालू कारोबार गहरी जड़ें जमा चुका है, और यह केवल छोटे स्तर का नहीं बल्कि संगठित रूप से संचालित नेटवर्क होने की आशंका को मजबूत करता है।

 

तरुण महतो को जेल भेजने के बाद अब स्थानीय जनता और सामाजिक कार्यकर्ता मांग कर रहे हैं कि— पुलिस की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच हो, थाना प्रभारी और संबंधित पुलिसकर्मियों को जांच के दायरे में लाया जाए, अवैध बालू कारोबार पर जिला प्रशासन पारदर्शी और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे।

 

फिलहाल प्रशासन तरुण महतो की गिरफ्तारी को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रहा है, लेकिन असल सवाल यह है कि क्या अवैध बालू नेटवर्क की जड़ें पुलिस तंत्र तक फैली हैं, और क्या उसकी भी निष्पक्ष जांच होगी?

मामले ने ईचागढ़ और आसपास के इलाकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है, और अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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