फ्रांस के पर्यटक हुए छऊ कला के मुरीद, चोगा में नटराज कला केंद्र के कलाकारों ने बांधा समां

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फ्रांस के पर्यटक हुए छऊ कला के मुरीद, चोगा में नटराज कला केंद्र के कलाकारों ने बांधा समां

ईचागढ़, 23 अक्टूबर: सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड के चोगा गांव स्थित नटराज कला केंद्र आज अंतरराष्ट्रीय छऊ कला के रंगों से सराबोर हो गया, जब फ्रांस से आए पर्यटकों का एक दल यहां पहुंचा। गांव के खुले मंच पर पारंपरिक मानभूम छऊ नृत्य का मनमोहक प्रदर्शन हुआ, जिसने विदेशी मेहमानों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

अंतरराष्ट्रीय छऊ नृत्य कलाकार एवं नटराज कला केंद्र के सचिव प्रभात कुमार महतो के निर्देशन में कलाकारों ने मां दुर्गा द्वारा महिषासुर वध की पौराणिक कथा को छऊ नृत्य के माध्यम से जीवंत कर दिया। नर्तकों के भव्य मुखौटे, रंगीन पोशाकें, और ढोल-नगाड़े की ताल पर सजे कदमों ने ऐसा समां बांधा कि फ्रांसीसी मेहमान झूम उठे।

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक दृश्य रहा ‘बाघ नृत्य’, जिसे देखकर पर्यटक रोमांचित हो उठे। उन्होंने छऊ नृत्य की शैली, साज-सज्जा, और मुखौटा निर्माण की कला के बारे में विस्तार से जानकारी ली।

नई दिल्ली से आए गाइड सानु कुमार गीरी ने बताया कि यह पर्यटक दल गो ट्रेवल रांची के सहयोग से फ्रांस से दिल्ली और फिर सीधे चोगा गांव पहुंचा था। उन्होंने कहा, “फ्रांस के पर्यटक भारतीय पारंपरिक नृत्यकला से बहुत प्रभावित हुए हैं। वे पेरिस और अन्य शहरों में छऊ नृत्य के प्रचार-प्रसार की इच्छा रखते हैं।”

मौके पर नटराज कला केंद्र के सचिव प्रभात कुमार महतो, जयराम महतो, मनरेगा लेखपाल संतोष कुमार राय समेत कई स्थानीय कलाकार एवं ग्रामीण उपस्थित थे।

छऊ नृत्य के माध्यम से झारखंड की सांस्कृतिक विरासत एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी गूंज छोड़ गई — और चोगा गांव एक दिन के लिए “छऊ की धरती पर मिनी पेरिस” बन गया।

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