सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गंदगी का साम्राज्य, मरीज खुले में शौच को मजबूर

नीमडीह सीएचसी की बदहाली पर उठे गंभीर सवाल
नीमडीह, 5 फरवरी : चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के रघुनाथपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नीमडीह में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। अस्पताल परिसर में बने शौचालय गंदगी के अंबार में तब्दील हो चुके हैं, जिससे इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। हालात ऐसे हैं कि मरीजों को खुले में शौच करने के लिए विवश होना पड़ रहा है, जो स्वच्छ भारत अभियान और स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल रहा है।
प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इस स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिनमें महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल होते हैं। बावजूद इसके शौचालयों की हालत इतनी दयनीय है कि अंदर जाना तक मुश्किल हो गया है। चारों ओर फैली गंदगी, दुर्गंध और पानी की पूरी तरह अनुपलब्धता ने मरीजों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है।

सफाई कर्मी मौजूद, फिर भी शौचालय बदहाल
हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य केंद्र में सफाई कर्मी नियुक्त होने के बावजूद नियमित साफ-सफाई नहीं हो रही है। शौचालयों में न तो पानी की व्यवस्था है और न ही कीटाणुनाशक का छिड़काव किया जा रहा है। नतीजतन मरीज इलाज के साथ-साथ संक्रमण के खतरे से भी जूझने को मजबूर हैं।
ग्रामीण मरीज सबसे अधिक परेशान
दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों के लिए यह स्थिति और भी पीड़ादायक है। महिलाओं को शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है, वहीं बुजुर्गों और गंभीर रोगियों को खुले में जाने से शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन की उदासीनता पर सवाल
नीमडीह प्रखंड मुख्यालय परिसर से सटे इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की दुर्दशा स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार पदाधिकारी अब तक आंख मूंदे बैठे हैं। न तो निरीक्षण होता है और न ही सुधार की कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है।
कागजों में स्वच्छता, जमीनी हकीकत कुछ और
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन द्वारा स्वच्छता को लेकर किए जा रहे दावे इस स्वास्थ्य केंद्र की हालत देखकर खोखले नजर आते हैं। अगर समय रहते शौचालयों की मरम्मत, पानी की व्यवस्था और नियमित सफाई सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह स्वास्थ्य केंद्र बीमारी दूर करने के बजाय बीमारी फैलाने का अड्डा बन सकता है।
अब देखना यह है कि खबर सामने आने के बाद प्रशासन जागता है या फिर मरीजों को यूं ही नारकीय हालात में इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।



