सरायकेला के गुंडिचा मंदिर में सांस्कृतिक संध्या ने बिखेरा भक्ति और संस्कृति का अनुपम रंग

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सरायकेला के गुंडिचा मंदिर में सांस्कृतिक संध्या ने बिखेरा भक्ति और संस्कृति का अनुपम रंग

सरायकेला, 22 जुलाई : गुंडिचा मंदिर प्रांगण में आयोजित सांस्कृतिक संध्या श्रद्धा, भक्ति और भारतीय संस्कृति का अनुपम संगम बन गई। श्री जगन्नाथ मेला समिति के सांस्कृतिक सचिव रूपेश साहू के विशेष प्रयास, कुशल समन्वय एवं प्रभावी मंच संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

नटराज कला मंदिर के मुन्ना जी, विजया जी एवं रेखा जी के कुशल निर्देशन में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भगवान श्री जगन्नाथ को समर्पित भक्ति एवं धार्मिक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। बच्चों की भावपूर्ण अभिव्यक्ति, अनुशासित प्रस्तुति और आकर्षक नृत्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा गुंडिचा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए।

इसी क्रम में सेवानिवृत्त शिक्षक रमन मास्टर द्वारा प्रस्तुत “नीलांचल धाम” ओड़िआ भजन ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उनकी मधुर एवं भक्तिमय प्रस्तुति को दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा।

कार्यक्रम की सफलता में उपाध्यक्ष गोविंद साहू एवं सचिव छोटे लाल साहू का विशेष योगदान रहा। उनके समर्पित सहयोग एवं समन्वय से कार्यक्रम सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

इस अवसर पर विश्वविख्यात सरायकेला छऊ परंपरा के अंतर्गत महाप्रभु के विशेष वेश-भूषा एवं छऊ मुखौटा परंपरा के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले छऊ मुखौटा गुरु एस.एन. अवार्डी सुशांत महापात्र को नगर पंचायत सरायकेला के अध्यक्ष एवं श्री जगन्नाथ मेला समिति के अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी द्वारा मंच पर अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सरायकेला की लगभग 350 वर्ष पुरानी रथ यात्रा हमारी गौरवशाली धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। यह मेला झारखंड का दूसरा सबसे बड़ा रथ मेला है, जिसकी पहचान केवल इसकी भव्यता से नहीं, बल्कि अनुशासन, सामाजिक सद्भाव, आपसी भाईचारे और एक-दूसरे के सम्मान की अद्भुत परंपरा से भी है।

उन्होंने कहा कि यह मेला सदियों से समाज को एकता, सेवा, संस्कृति और भाईचारे का संदेश देता आया है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं एवं आगंतुकों से अपील की कि वे मेले की गरिमा, धार्मिक मर्यादा, स्वच्छता एवं अनुशासन बनाए रखें तथा एक-दूसरे का सम्मान करते हुए इस ऐतिहासिक परंपरा के सफल संचालन में सहयोग करें। उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी बच्चों, कलाकारों, प्रशिक्षकों एवं सहयोगियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।

कार्यक्रम में दिनेश साहू, रितिक साहू, रोशन साहू, मुकेश साहू सहित श्री जगन्नाथ मेला समिति के अनेक पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

अंत में श्री जगन्नाथ मेला समिति ने सभी कलाकारों, प्रशिक्षकों, सहयोगियों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन हमारी समृद्ध धार्मिक परंपरा, भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम हैं।

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