कपाली प्रकरण में बढ़ा दबाव – आदिवासी युवती से कथित दुर्व्यवहार मामले में निलंबित पुलिसकर्मियों पर SC/ST एक्ट के तहत एफआईआर व जेल भेजने की मांग
सरायकेला/चांडिल, 17 जून : कपाली ओपी में आदिवासी युवती अल्पना माहली के साथ कथित मारपीट एवं दुर्व्यवहार के मामले में निलंबित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग तेज हो गई है। बुधवार को विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने सरायकेला-खरसावां की पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी से मुलाकात कर तत्कालीन कपाली ओपी प्रभारी धीरंजन कुमार, सहायक अवर निरीक्षक मोहम्मद मुकलेसुर रहमान तथा महिला आरक्षी कंचन झा के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित अन्य संगीन धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।
पीड़िता के भाई राहुल माहली ने एसपी को सौंपे शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि उनकी बहन को कई घंटों तक कपाली ओपी के एक कमरे में बंद रखा गया तथा उसके साथ बर्बरतापूर्ण मारपीट की गई। शिकायत में दावा किया गया है कि युवती को गंभीर शारीरिक चोटें आई हैं और वह फिलहाल जमशेदपुर स्थित एमजीएम अस्पताल में उपचाराधीन है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह मामला अवैध हिरासत, मानवाधिकार उल्लंघन तथा अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिला के साथ अत्याचार से जुड़ा है। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर चोट पहुंचाने, गलत तरीके से बंधक बनाने, आपराधिक बल प्रयोग, महिला की गरिमा भंग करने, आपराधिक धमकी देने, लोकसेवक द्वारा अधिकारों के दुरुपयोग तथा एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की है। साथ ही आरोपित पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की भी मांग उठाई गई है।
शिकायत पत्र की प्रतिलिपि राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्रालय, आदिवासी कल्याण मंत्री, पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक तथा कोल्हान क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक को भी भेजे जाने की बात कही गई है।
यह है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, 15 जून की शाम कपाली पुलिस ने अल्पना माहली को उसकी लापता सहेली के संबंध में पूछताछ के लिए ओपी बुलाया था। इसके बाद युवती ने पुलिसकर्मियों पर मारपीट और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। 16 जून को मामला सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया के माध्यम से व्यापक रूप से सामने आया, जिसके बाद आदिवासी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वरीय अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी निधि द्विवेदी ने तत्काल जांच के आदेश देते हुए चांडिल अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी शिव प्रकाश कुमार को जांच की जिम्मेदारी सौंपी। एसडीपीओ द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट के आधार पर मंगलवार शाम तत्कालीन ओपी प्रभारी धीरंजन कुमार, एएसआई मोहम्मद मुकलेसुर रहमान और महिला आरक्षी कंचन झा को निलंबित कर दिया गया।
अब आदिवासी संगठनों और पीड़ित पक्ष की मांग है कि विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आरोपित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाए। मामले में पुलिस की अगली कार्रवाई पर क्षेत्रवासियों की निगाहें टिकी हुई हैं।