राजनीतिक सीमाएं टूटीं : बाइक से पहुंचे अर्जुन मुंडा और सुदेश महतो, गुरुजी को दी अंतिम विदाई

मानभूम अपडेट्स,5 अगस्त : झारखंड के जननायक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के अंतिम संस्कार में मंगलवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने यह साबित कर दिया कि व्यक्तिगत और वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर भी श्रद्धा प्रकट की जा सकती है।
पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अर्जुन मुंडा तथा आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो गुरुजी को अंतिम जोहार करने बाइक से नेमरा गांव पहुंचे। सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं की यह तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रही हैं, जिसे जनता भावुक होकर साझा कर रही है।

6 किमी जाम, फिर भी नहीं रुकी श्रद्धा की राह
रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड अंतर्गत नेमरा गांव में जब शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार हो रहा था, उस समय अंतिम यात्रा मार्ग पर हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। इसी दौरान अर्जुन मुंडा और सुदेश महतो बरलंगा चौक के पास भीषण जाम में फंस गए।
दोनों नेता किसी भी हाल में अंतिम संस्कार में देरी नहीं चाहते थे। ऐसे में आजसू कार्यकर्ताओं ने मौके पर बाइक की व्यवस्था की और नेताओं ने जाम के बीच से बाइक पर सवार होकर लगभग 6 किलोमीटर का सफर तय किया। उनके साथ आजसू पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर, वरिष्ठ नेता हसन अंसारी, मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत सहित कई अन्य नेता भी बाइक से नेमरा पहुंचे।
राजनीतिक विचारधाराओं से ऊपर उठा सम्मान
यह दृश्य इसलिए भी खास बन गया क्योंकि यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि राजनीतिक मर्यादा और आपसी सम्मान का प्रतीक बन गया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता अर्जुन मुंडा, आजसू प्रमुख सुदेश महतो और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक सदस्य दिवंगत शिबू सोरेन — ये सभी अलग-अलग विचारधाराओं और दलों का प्रतिनिधित्व करते हैं। बावजूद इसके, शिबू सोरेन के प्रति उनका आदर इस कठिन परिस्थिति में भी स्पष्ट दिखा।गुरुजी के प्रति ऐसी भावनात्मक श्रद्धांजलि ने यह सिद्ध कर दिया कि राजनीति सेवा का माध्यम है, न कि दूरी बनाने का।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ क्षण
बाइक से सफर करते हुए अर्जुन मुंडा और सुदेश महतो की तस्वीरें व वीडियो विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रही हैं। लोगों ने इन नेताओं के इस भाव को “सच्ची श्रद्धांजलि” और “राजनीतिक आदर्श” बताया है।
गुरुजी के लिए समर्पण, जो सदियों तक याद रहेगा
गुरुजी के अंतिम संस्कार में आमजन से लेकर राजनेताओं तक की भारी उपस्थिति थी, लेकिन अर्जुन मुंडा और सुदेश महतो का यह समर्पण विशेष रूप से स्मरणीय बन गया।
यह क्षण झारखंड की राजनीतिक संस्कृति में एक नई मिसाल के तौर पर दर्ज हो गया — जहां सम्मान, संबंध और संवेदना ने दलगत सीमाओं को पार कर लिया।



