पातकोम दिशोम मांझी पारगाना महाल सम्मेलन संपन्न, ओलचिकी शिक्षा व नशामुक्ति पर जोर

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पातकोम दिशोम मांझी पारगाना महाल सम्मेलन संपन्न, ओलचिकी शिक्षा व नशामुक्ति पर जोर

चांडिल, 18 मई : पातकोम दिशोम मांझी पारगाना महाल का दो दिवसीय वार्षिक महासम्मेलन चांडिल डैम स्थल स्थित शीशमहल में संपन्न हुआ। सम्मेलन में संथाल समाज की पारंपरिक व्यवस्था को मजबूत बनाने, मातृभाषा ओलचिकी के प्रचार-प्रसार, नशामुक्त समाज निर्माण और जनगणना में सारना धर्म दर्ज कराने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इसके पूर्व सम्मेलन का शुभारंभ सिद्धो-कान्हू और पंडित रघुनाथ मुर्मू की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पातकोम दिशोम देश पारगाना रामेश्वर बेसरा ने की। सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने समाज के लोगों से बच्चों को हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ मातृभाषा ओलचिकी की शिक्षा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही समाज को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा माध्यम है। साथ ही उन्होंने नशापान और अंधविश्वास से दूर रहने का आह्वान किया। दुगनी पीढ़ पारगाना दिवाकर सोरेन ने संथाल समाज की पारंपरिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा समाज में एकजुटता बनाए रखने पर जोर दिया।

इस अवसर पर माझी पारगाना महाल के महासचिव श्यामल मार्डी ने आगामी जनगणना में अपने धर्म के रूप में “सारना” दर्ज कराने की अपील की। सम्मेलन में समाज के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले मांझी बाबाओं को गमछा देकर सम्मानित किया गया। वहीं पिछले 35 वर्षों से साइकिल के माध्यम से गांव-गांव घूमकर समाज को जागरूक करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता पूर्ण चंद्र बेसरा को पातकोम दिशोम मांझी पारगाना महाल की ओर से साइकिल भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में सालखान सोरेन, बाबलू मुर्मू, दोलू सिंह सरदार, चारुचांद किस्कू, कुनाराम सोरेन, महेश्वर मुर्मू, शिलु सारना टुडू, सोमरा मार्डी, हाराधन मार्डी और नेपाल बेसरा समेत बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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