नीमडीह प्रखंड में ठप पड़ी सरकारी एम्बुलेंस सेवा, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
नीमडीह, 06 सितंबर : सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल स्थिति एक बार फिर उजागर हो गई है। इन दिनों रूपाडीह गांव में डायरिया का प्रकोप है। यहां दो दर्जन से अधिक ग्रामीण बीमार हो गए हैंं। इनमें कई मरीजों की हालत गंभीर थी, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लेकिन अफसोस की बात यह रही कि उन्हें सरकारी एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं हो सकी।
108 एम्बुलेंस महीनों से खराब
नीमडीह प्रखंड मुख्यालय के लिए आवंटित 108 एम्बुलेंस खराब पड़ी है। विभागीय स्तर पर कई बार शिकायतें दर्ज होने के बावजूद अब तक इस एम्बुलेंस की मरम्मत नहीं की गई। परिणामस्वरूप ग्रामीणों को आपात स्थिति में निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे पीड़ितों का आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य केंद्र में एम्बुलेंस का अभाव
नीमडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में एम्बुलेंस सेवा की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। यहां एक भी सरकारी एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गंभीर रूप से बीमार मरीजों को सदर अस्पताल या जमशेदपुर तक ले जाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
रूपाडीह का उदाहरण
डायरिया पीड़ित मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में ग्रामीणों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। कई मरीजों को निजी गाड़ियों या ऑटो-रिक्शा से अस्पताल लाना पड़ा। इस दौरान न केवल समय की बर्बादी हुई बल्कि रोगियों की हालत और बिगड़ने का भी खतरा बना रहा। समाजसेवी हरे लाल महतो ने इस आपात स्थिति में अपने निजी एम्बुलेंस का निशुल्क सेवा दी और कई मरीजों को अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया है।
भयावह संकट की संभावना
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रखंड क्षेत्र में किसी गंभीर दुर्घटना, महामारी या आपदा जैसी स्थिति उत्पन्न होती है तो एम्बुलेंस सेवा के ठप रहने से भयावह संकट खड़ा हो सकता है। समय पर मरीजों को अस्पताल तक न पहुंचा पाने की स्थिति में जनहानि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द नीमडीह प्रखंड में एम्बुलेंस सेवा बहाल करने की मांग की है।
भेदभाव करने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक के वरीय पदाधिकारी नीमडीह प्रखंड जैसे सुदूरवर्ती क्षेत्र के साथ भेदभाव कर रहें हैं। प्रशासनिक उदासीनता के कारण ही नीमडीह जैसे दूरस्थ प्रखंड के लोग मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।