ईचागढ़ थाना में नेतृत्व परिवर्तन, पूर्व प्रभारी की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का विषय—नए थाना प्रभारी बजरंग महतो के सामने कई चुनौतियाँ

ईचागढ़/ चांडिल, 23 नवंबर : ईचागढ़ थाना में शनिवार शाम नेतृत्व परिवर्तन हुआ, जब बजरंग महतो ने नए थाना प्रभारी के रूप में पदभार ग्रहण किया। लेकिन पदभार ग्रहण समारोह के दौरान एक अनोखी स्थिति देखने को मिली—तत्कालीन थाना प्रभारी विक्रमादित्य पांडेय मौके पर मौजूद नहीं रहे। यह घटना न केवल पुलिस व्यवस्था की औपचारिक परंपराओं के विरुद्ध मानी जा रही है, बल्कि स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय भी बन गई है।
गौरतलब है कि चौका थाना में नए थाना प्रभारी सोनू कुमार को पदभार सौंपते समय बजरंग महतो स्वयं मौजूद थे और उन्होंने सभी औपचारिकताएँ निभाईं। ऐसे में ईचागढ़ में इस शिष्टाचार के पालन न होने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोग इसे विक्रमादित्य पांडेय के ‘कार्यकाल से लेकर अंतिम क्षण तक पुलिसिया नियमों की अनदेखी’ के रूप में देख रहे हैं।
नए थाना प्रभारी के सामने चुनौतियों का अंबार
पदभार ग्रहण करते ही बजरंग महतो के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियाँ खड़ी हैं। सबसे बड़ी चुनौती है—पुलिस और पब्लिक के बीच बनी दूरी को कम करना। पूर्व थाना प्रभारी के कार्यकाल में जनता और पुलिस के संबंधों में आई खटास को दूर करना नए प्रभारी के लिए प्राथमिकता माना जा रहा है।
क्षेत्र में शांति और विधि-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस-पब्लिक भरोसे का पुनर्निर्माण बेहद आवश्यक है।
अवैध गतिविधियों पर नकेल कसना भी प्राथमिकता
साथ ही बजरंग महतो को अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण की बड़ी जिम्मेदारी निभानी होगी— अवैध बालू खनन, परिवहन और भंडारण। अवैध स्क्रैप टाल संचालकों पर कार्रवाई। अवैध एवं नकली शराब कारोबार पर रोक। इन मुद्दों पर लगातार शिकायतें मिलती रही हैं और स्थानीय लोग प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।
क्या ईचागढ़ थाना की छवि बदलेगी?
पूर्व थाना प्रभारी के कार्यकाल में ईचागढ़ थाना की छवि पर दाग लगने के आरोप लगे थे। अब लोगों की निगाहें बजरंग महतो पर हैं—क्या वे थाना की खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस ला पाएँगे और इसे एक स्वच्छ, ईमानदार और पब्लिक-फ्रेंडली थाना के रूप में स्थापित कर पाएँगे?
आने वाले दिनों में उनके कदम और कार्यशैली इस दिशा में बड़ा संकेत देंगे।



