कुकडू : तुलिनडीह जंगल में हाथी की दहशत, वन विभाग की लापरवाही उजागर – ग्रामीण सतर्क रहें, हाथी भगाओ दस्ता तत्काल सक्रिय हो : मधुश्री महतो

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कुकडू : तुलिनडीह जंगल में हाथी की दहशत, वन विभाग की लापरवाही उजागर – ग्रामीण सतर्क रहें, हाथी भगाओ दस्ता तत्काल सक्रिय हो : मधुश्री महतो

कुकडू, 21 जनवरी : सरायकेला खरसावां जिले के कुकडू प्रखंड अंतर्गत तुलिनडीह जंगल क्षेत्र में बुधवार की शाम एक जंगली हाथी को सड़क पार करते हुए देखे जाने से इलाके में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों के अनुसार, शाम करीब 5:30 बजे हाथी सड़क पर विचरण करता नजर आया, जिसके बाद यह खबर आग की तरह पूरे क्षेत्र में फैल गई और ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया।

ज्ञात हो कि चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में बीते कुछ समय से जंगली हाथियों के उत्पात से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। हाथियों के कारण कई गांवों में फसल क्षति, संपत्ति नुकसान और जान-माल का खतरा लगातार बना हुआ है। बावजूद इसके, हाथियों पर नियंत्रण को लेकर वन विभाग की भूमिका पूरी तरह निष्क्रिय और असफल नजर आ रही है।

इस गंभीर मामले को लेकर जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने वन विभाग पर तीखा हमला बोलते हुए विभाग को तत्काल अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि क्षेत्र में हाथी भगाओ दस्ता को अविलंब सक्रिय रखा जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

मधुश्री महतो ने कहा कि वन विभाग द्वारा हाथियों के नियंत्रण के लिए अब तक कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाथियों से हुई क्षति के बाद ग्रामीणों को मिलने वाला मुआवजा भुगतान महीनों तक लंबित रहता है, जिससे पीड़ित परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि समय रहते हाथियों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने ग्रामीणों से रात्रि के समय जंगल एवं सुनसान सड़कों पर आवाजाही से बचने, समूह में रहने और हाथी दिखने की स्थिति में तुरंत प्रशासन व वन विभाग को सूचना देने की अपील की।

ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जान का खतरा मंडराने के बावजूद वन विभाग कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन और वन विभाग कब तक जागता है और क्षेत्रवासियों को इस भय के माहौल से राहत मिलती है।

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