ओत गुरु कोल लाको बोदरा के नाम से जाना जाएगा जसकनडीह चौक

चौक पर लगाया जाएगा ओत गुरु का आदमकद प्रतिमा.
जमशेदपुर,29 जून : हो भाषा वारंग क्षिति लिपि के जनक ओत गुरु कोल लाको बोदरा के 39वीं पुण्यतिथि के अवसर पर रविवार को भारी बारिश के बीच जसकनडीह चौक का नामकरण लाको बोदरा चौक के नाम पर किया गया. वहीं, पुण्यतिथि के अवसर पर जमशेदपुर स्थित जसकनडीह में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान गुरु कोल लाको बोदरा के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया. मौके पर आदिवासी हो समाज युवा महासभा के केंद्रीय उपाध्यक्ष सुरा बिरुली, जमशेदपुर प्रखंड के उप प्रमुख शिव हांसदा, वरिष्ठ समाजसेवी गंगाराम बानरा ने संयुक्त रूप से कहा कि लाको बोदरा ने चालीस के दशक में हो भाषा की लिपि वारंग क्षिति का खोज कर लिपि का विस्तार किया और उसके प्रचार-प्रसार के लिए संस्था भी स्थापना की. लाको बोदरा हो भाषा के लिए वाराङ चिति लिपि का आविष्कार कर भाषा और साहित्य क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया है. नवोन्मेष और नवाचार का अद्भुत उदाहरण नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत किया है. सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि लिपि के बिना किसी भी भाषा और साहित्य का संवर्धन नहीं हो सकता है, इसलिए सभी छात्र-छात्राओं को निश्चित रूप से अपनी लिपि सीखनी चाहिए. भाषा और साहित्य के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास करना चाइए. कार्यक्रम में मुख्य रूप से गंगाराम बानरा, मोना देवगम, सकरु कुंकल, शिव कुमार हंसदा, राहुल हो, रतन समड, लखीन्द्र कुंकल, बेतो कुंकल, गुरु चरण समड समेत कई लोग उपस्थित थे.



