आदिवासी बचाओ संघर्ष मोर्चा ने महारैली निकालकर कुर्मियों के मांग का किया विरोध

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आदिवासी बचाओ संघर्ष मोर्चा ने महारैली निकालकर कुर्मियों के मांग का किया विरोध


जमशेदपुर, 09 अक्टूबर : आदिवासी बचाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले गुरुवार को पूर्वी सिंहभूम जिला मुख्यालय के समक्ष आदिवासी जन आक्रोश महारैली का आयोजन किया गया। इसके पूर्व साकची स्थित आम बगान से उपायुक्त कार्यालय तक जनजाति समुदाय के लोग पारंपरिक वेशभूषा में पारंपरिक औजार और वाद्य यंत्रों के साथ रैली निकाली। महारैली सह विरोध प्रदर्शन का आयोजन कुरमी – कुड़मी, महतो समुदाय द्वारा किए जा रहे जनजाति सूची में शामिल करने कि मांग के विरोध में किया गया।

महारैली में आदिवासी उरांव, हो, भूमिज, संथाल, मुंडा, बिरहोर, सबर, बेदिया, गोड़, खाडिया समेत सभी 33 आदिवासी समाज के सामाजिक संगठन, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था मानकी मुंडा संघ, मांझी परगना महाल ने एकजुटता दिखाते हुए शामिल हुए। विरोध प्रदर्शन के दौरान होकर राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया।

आदिवासी बचाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आदिवासी जन आक्रोश महारैली के माध्यम से समस्त जनजातीय समुदाय कि ओर से कहा गया कि विगत दिनों कुरमी – कुड़मी समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति में सूचीबद्ध करने की मांग पर रेल टेका आंदोलन किया गया था, जो असंवैधानिक है। वक्ताओं ने कहा कि जनजाति समाज की अपनी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था है तथा वे प्रकृति के उपासक है।

आदिवासियों का जीवनशैली उनके अपेक्षा काफी भिन्न है। वर्तमान कि वास्तविक परस्थिति में जनजातीय लोगो के अपेक्षा कुड़मी, महतो समुदाय का रहन – सहन काफी भिन्न है। कहीं ना कहीं उनका यह मांग आदिवासियों के अस्तित्व, पहचान, संवैधानिक अधिकारों के लिए ख़तरा है, इसलिए सभी जनजातीय समुदाय उनके इस मांग का कड़ा विरोध करते है।

मौके पर सुरा बिरुली ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा 23 नवंबर 2004 को पारित प्रस्ताव में कुरमी/महतो को आदिवासी सूची में शामिल करने हेतू अनुशंसा केंद्र सरकार को प्रेषित किया गया था। जिसे केंद्र सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। आदिवासी बचाओ संघर्ष मोर्चा ने कुरमी/महतो द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन के आधार पर उन्हें अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने संबंधी विधेयक को झारखंड विधानसभा, लोकसभा में पेश नहीं करने की मांग की है। ताकि हम प्रकृतिवादी आदिवासियों की अस्मिता और अस्तित्व को यथावत संरक्षित किया जा सके।

महारैली में दुर्गा चरण मुर्मू, सुरा बिरुली, दिनकर कच्छप, राजेश, दीपक मांझी, राकेश उरांव, नंदलाल पातर, डेमका सोय, रवि सवैया, मोहिन सिंह सरदार, उपेंद्र बानरा, ठाकुर कलुण्डिया, डीबार पूर्ति, जेवियर कुजूर, लालमोहन जामुदा, लालमोहन मुर्मू, सुनिल मुर्मू, पिथो सांडिल, परसो राम कर्मा, सुखलाल बिरुली, सुकराम सामद, प्रेम सामड समेत बड़ी संख्या में महिला पुरुष शामिल थे।

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