अवैध लॉटरी बना कोल्हान का अपराध कुंभ, चांडिल की घटना को जानिए

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“अवैध लॉटरी बना कोल्हान का अपराध कुंभ, चांडिल की घटना को जानिए”

चांडिल, 03 जुलाई : झारखंड के कोल्हान क्षेत्र में एक बार फिर अवैध लॉटरी का कारोबार जड़ें जमाने लगा है। खासकर सरायकेला-खरसावां और जमशेदपुर के ग्रामीण इलाकों में नकली और प्रतिबंधित लॉटरी की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है। यह केवल एक गैरकानूनी धंधा भर नहीं रह गया है, अब यह अपराध, धोखाधड़ी और हिंसा की नई पटकथा लिख रहा है। हालिया घटना ने न सिर्फ सामाजिक तानेबाने को झकझोरा है, बल्कि स्थानीय पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता और लापरवाही को भी बेनकाब किया है।

चांडिल में लॉटरी से निकला अपहरण और पिटाई का मामला

चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत डैम रोड स्थित पुराने कोर्ट परिसर के पास एक होटल में बैठे तीन मित्रों की बातचीत में लॉटरी की चर्चा ने जो मोड़ लिया, वह सीधे जंगल की हिंसा तक जा पहुंचा। तीनों ने आपसी सहमति से एक बंडल लॉटरी खरीदी, जो पश्चिम बंगाल से संचालित अवैध लॉटरी थी — जो झारखंड में पूरी तरह प्रतिबंधित है। इनमें से एक मित्र स्वयं लॉटरी एजेंट था।

जैसे ही अगले दिन उक्त बंडल में 4.5 लाख रुपये की इनामी राशि निकली, मित्रता का रिश्ता लोभ, बेईमानी और फिर हिंसा में बदल गया। पैसे हजम करने की नीयत से एजेंट ने अपने दो मित्रों को झूठ बोलकर टालने की कोशिश की। नतीजा – उनमें से एक मित्र ने गाड़ी में बैठाकर एजेंट और एक अन्य साथी को उठाया, जंगल में ले जाकर पेड़ से बांधा और जमकर पिटाई की। पीट-पीटकर एजेंट से कबूलवाया गया कि लॉटरी उसके घर में ही रखी है। बाद में लौटकर उसने लॉटरी और जीत की रकम अपने “अपहरणकर्ता” को सौंप दी। हालांकि, इस घटना को लेकर स्थानीय पुलिस को किसी ने शिकायत अथवा सूचना नहीं दी है लेकिन चांडिल क्षेत्र में यह घटना चर्चाओं में है।

इस घटना से एक बात साफ है कि कोल्हान में अवैध लॉटरी का खेल अब केवल जुए तक सीमित नहीं है – यह आपसी संघर्ष, मारपीट, अपहरण और अपराध का कारण बनता जा रहा है। मगर हैरानी की बात यह है कि यह सब होते हुए भी स्थानीय पुलिस प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।

क्या पुलिस को यह नहीं पता कि पश्चिम बंगाल से संचालित लॉटरी बंडल, झारखंड में किस नेटवर्क से बिक रहे हैं? क्या चांडिल जैसे छोटे कस्बों तक इन लॉटरी के बंडल पहुंचने और खुलेआम बिकने की जानकारी थाना स्तर पर नहीं है? क्या ग्रामीण क्षेत्रों में लॉटरी के नाम पर होने वाली इस खुली लूट पर पुलिस की कोई निगरानी नहीं?

यदि समय रहते पुलिस ने चांडिल, नीमडीह, चौका, सरायकेला, पटमदा और घाटशिला जैसे क्षेत्रों में फैल रहे अवैध लॉटरी नेटवर्क को न रोका, तो शायद आने वाले समय में यह अपराध की मुख्य जड़ बन जाएगी।

अवैध लॉटरी अब कोल्हान क्षेत्र में एक सामाजिक नासूर बनती जा रही है। यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि सामाजिक ताना-बाना तोड़ने का ज़रिया भी बन रही है। छोटे-छोटे लाभ के लिए मित्र एक-दूसरे के दुश्मन बनते जा रहे हैं।

स्थानीय प्रशासन और पुलिस को अब और चुप नहीं रहना चाहिए। लॉटरी के इस पूरे रैकेट पर नकेल कसने के लिए कठोर कार्रवाई जरूरी है। वरना वह दिन दूर नहीं जब इस लॉटरी के नशे में कोल्हान क्षेत्र गैंगवार, हत्याओं और बड़े आपराधिक संगठनों का गढ़ बन जाए।

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