श्रद्धा से पूजी जा रही मां विपदतारिणी, चांडिल के प्राचीन दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़
चांडिल, 18 जुलाई : बांग्ला पंचांग के सावन माह के पहले शनिवार को चांडिल अनुमंडल समेत पूरे मानभूम क्षेत्र में शनिवार को श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ मां विपदतारिणी पूजा का महाव्रत मनाया जा रहा है। सुबह से ही माता के मंदिरों में महिलाओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर परिवार की सुख-समृद्धि, लंबी आयु और मंगलकामना के लिए मां विपदतारिणी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
धार्मिक मान्यता के अनुसार मां विपदतारिणी अपने भक्तों को हर प्रकार की विपत्ति और संकट से रक्षा करती हैं। इसी आस्था के साथ महिलाओं ने पूरे श्रद्धाभाव से पूजा संपन्न की। बांग्ला पंचांग के अनुसार सावन माह के पहले शनिवार अथवा मंगलवार को होने वाली इस पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने मां को 13 प्रकार के फल, 13 प्रकार के फूल तथा 13 प्रकार के मिष्ठान अर्पित किए। वहीं 13 गांठों वाला पवित्र रक्षा सूत्र तैयार कर परिवार के सदस्यों की कलाई में बांधा गया, जिसे रक्षा, सुख-समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
चांडिल बाजार स्थित 150 वर्ष पुराने सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। चांडिल बाजार के अलावा रुचाप, भालुककोचा, लेंगडीह, गांगूडीह तथा आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में महिलाएं मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचीं।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुरोहितों ने विधिवत पूजा संपन्न कराई तथा श्रद्धालुओं को मां विपदतारिणी की पावन कथा सुनाई। पूजा के दौरान महिलाओं ने परिवार की खुशहाली, सुख-शांति, निरोगी जीवन और सभी संकटों से रक्षा की कामना करते हुए मां से आशीर्वाद मांगा।
पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना हुआ है। मंदिरों में पूजा-अर्चना, कथा श्रवण और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मां विपदतारिणी के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। श्रद्धालुओं ने विश्वास व्यक्त किया कि मां की कृपा से परिवार पर आने वाली हर विपत्ति दूर होती है और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का वास होता है।