लोकार्पण के पहले महीने में ही चांडिल-पुरुलिया वैकल्पिक मार्ग जर्जर, 18 दिन में खुल गई “विकास” की पोल – मंत्री संजय सेठ और एनएचएआई पर उठे सवाल

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लोकार्पण के पहले महीने में ही चांडिल-पुरुलिया वैकल्पिक मार्ग जर्जर, 18 दिन में खुल गई “विकास” की पोल – मंत्री संजय सेठ और एनएचएआई पर उठे सवाल

चांडिल, 14 अगस्त : चांडिल-पुरुलिया वैकल्पिक मार्ग (नया बाईपास रोड) का हाल महज कुछ ही दिनों में बेहाल हो गया है। बीते 27 जुलाई को केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री सह रांची सांसद संजय सेठ ने बड़े धूमधाम से इस मार्ग का लोकार्पण किया था। उद्घाटन के समय भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मंत्री की जमकर तारीफ की, मानो यह सड़क विकास का आदर्श उदाहरण हो। लेकिन लोकार्पण के एक माह से पहले ही सड़क की दुर्दशा ने पूरे दावों की पोल खोल दी है।

रावताड़ा से पितकी तक नए बने मार्ग की परत उखड़ चुकी है, पिचिंग धंस गई है और जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। आम जनता सवाल उठा रही है—जब करोड़ों की लागत से सड़क बनी तो यह हालत इतनी जल्दी कैसे हो गई? क्या यह संवेदक की लापरवाही और घटिया निर्माण सामग्री का नतीजा है, या फिर एनएचएआई के अधिकारियों की निगरानी में घोर लापरवाही हुई?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि उद्घाटन के समय भाजपा नेताओं ने श्रेय लेने की होड़ लगाई थी, लेकिन अब सड़क की बर्बादी पर कोई जिम्मेदारी लेने आगे नहीं आ रहा। मंत्री संजय सेठ से लेकर एनएचएआई तक, सभी चुप्पी साधे हैं। न तो दोषियों पर कार्रवाई की कोई घोषणा हुई है, न ही मरम्मत की ठोस योजना सामने आई है। लोगों का कहना है कि अगर इस मामले में कड़ी जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो यह महज एक और “लीपापोती” का मामला बनकर रह जाएगा।

चाहे जो भी हो, चांडिल-पुरुलिया वैकल्पिक मार्ग का महज एक महीने में दम तोड़ देना, मंत्री संजय सेठ के ‘विकास मॉडल’ और एनएचएआई की कार्यशैली पर करारा तमाचा है। यह घटना न सिर्फ सरकारी दावों की सच्चाई उजागर करती है, बल्कि करोड़ों रुपये की बर्बादी और जनता के साथ हुए सीधे विश्वासघात को भी सामने लाती है।

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