दलमा पहाड़ में ‘विकास’ के नाम पर विनाश! हाथियों की मौत, मूलनिवासियों का शोषण और वन विभाग पर गंभीर आरोप

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दलमा पहाड़ में ‘विकास’ के नाम पर विनाश! हाथियों की मौत, मूलनिवासियों का शोषण और वन विभाग पर गंभीर आरोप

चांडिल, 15 दिसंबर : सरायकेला-खरसावां एवं पूर्वी सिंहभूम जिले में बसा दलमा पहाड़, जिसे हाथियों का सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है, आज खुद अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। दलमा क्षेत्र ग्राम सभा सुरक्षा मंच के सह सचिव सत्य नारायण मुर्मू ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जब तक झारखंड के जंगलों की जिम्मेदारी बाहरी अधिकारियों के हाथ में रहेगी, तब तक जल, जंगल और जमीन का ऐसा ही शोषण चलता रहेगा।

उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े फ्लैटों में रहने वाले अधिकारी जंगल, वन्यजीव और यहां के मूलनिवासियों के दर्द को कभी नहीं समझ सकते। दलमा पहाड़ के विकास के नाम पर केंद्र सरकार द्वारा करोड़ों रुपये दिए जाते हैं, लेकिन आज तक न तो इन पैसों का सार्वजनिक हिसाब दिया गया और न ही ग्राम सभा को इसकी जानकारी देना जरूरी समझा गया।

आरोप है कि वन विभाग की मिलीभगत से पूंजीपतियों को संरक्षण दिया जा रहा है, जिसके चलते दलमा क्षेत्र में होटल, वेयरहाउस और कंपनियों का जाल फैलता जा रहा है। दूसरी ओर, इसी पहाड़ की रक्षा करने वाले खुटखट्टी रैयत, मूलनिवासी और 84 मौजा के लोग लगातार प्रताड़ना झेल रहे हैं। यहां तक कि आदिम जनजातियों—खड़िया, पहाड़िया और बिरहोड़—को भी बेघर करने की कोशिशें की जा रही हैं।

सत्य नारायण मुर्मू ने सवाल उठाया कि जो आम लोग वन विभाग के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें जेल भेज दिया जाता है। आखिर अधिकारी जनता की सेवा के लिए बनते हैं या शोषण के लिए?

उन्होंने चंपा हथिनी की मौत का भी जिक्र किया, जिसने 25 दिसंबर 2022 को अंतिम सांस ली। बताया गया कि चंपा 30 नवंबर से बीमार थी और 23 दिसंबर से कोमा में चली गई थी। इलाज के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने और चंपा व रजनी के नाम पर आए लाखों रुपये के अनाज का आज तक कोई हिसाब नहीं है। आखिर इन सबका जिम्मेदार कौन है?

दलमा को हाथियों का पहाड़ कहा जाता है, लेकिन ऐसे हालात में सवाल उठता है कि क्या वन विभाग हाथियों के संरक्षण में असफल रहा है या उन्हें खत्म करने की दिशा में काम कर रहा है। ग्राम सभा सुरक्षा मंच ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

गौरतलब हो कि रविवार सुबह नीमडीह थाना क्षेत्र के चातरमा जंगल में एक नर हाथी मौत हो गई। वह बीमार था और उसी हालत में दलदल में फंस गया था, जहां उसकी मौत हो गई। नर हाथी की मौत के बाद माहौल गर्म है। स्थानीय लोगों के अलावा विभिन्न सामाजिक एवं आदिवासी संगठनों द्वारा लगातार वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल खडे किए जा रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

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