सरायकेला में गुरु पूर्णिमा पर छऊ गुरुजनों एवं शिक्षाविदों का सम्मान – भारत की संस्कृति में गुरु का सर्वोच्च स्थान : मनोज चौधरी

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सरायकेला में गुरु पूर्णिमा पर छऊ गुरुजनों एवं शिक्षाविदों का सम्मान – भारत की संस्कृति में गुरु का सर्वोच्च स्थान : मनोज चौधरी

सरायकेला , 10 जुलाई  : गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सरायकेला स्थित राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र में सरायकेला छऊ आर्टिस्ट एसोसिएशन द्वारा भव्य “गुरु वंदन” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर छऊ नृत्य परंपरा से जुड़े पूज्य गुरुजनों एवं शिक्षाविदों का विधिवत पूजन कर आशीर्वाद लिया गया तथा उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट की गई।

कार्यक्रम के दौरान आर्टिस्ट एसोसिएशन के संरक्षक मनोज कुमार चौधरी ने कहा, “भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च रहा है। जैसा कि कबीर ने भी कहा है – गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय। भगवान से भी पहले गुरु को वंदन करने की परंपरा भारत की महान धरोहर है।”

अध्यक्ष भोला महांती ने अपने वक्तव्य में कहा कि, “गुरु केवल शिक्षा नहीं, बल्कि संस्कार और जीवन का पथ भी दिखाते हैं। वे अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान और प्रकाश की ओर ले जाते हैं।”

सचिव सुदीप कवि ने कहा, “बिना गुरु के जीवन में स्थायी सफलता असंभव है। गुरु ही हमारे जीवन के वास्तविक दिशा निर्देशक होते हैं।”

इस अवसर पर संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ छऊ गुरु विजेंद्र पटनायक, गुरु तरुण भोल, गुरु संतोष कुमार कर (काशी), शुशील कुमार आचार्य एवं गुरु आशीष कुमार कर को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इन सभी गुरुजनों को संस्था की ओर से शॉल, पुष्पगुच्छ एवं प्रतीकचिह्न भेंट कर सम्मान प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के समन्वयक तथा आर्टिस्ट एसोसिएशन के सचिव सुदीप कवि, उत्कल युवा एकता मंच के रूपेश साहू, नीरज पटनायक, गजेंद्र मोहंती, विजय दोरोगा, शिवनाथ मिश्रा, पंकज साहू, राकेश कवि समेत बड़ी संख्या में कलाकार, प्रशिक्षु एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

इस आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि छऊ नृत्य परंपरा में गुरु का स्थान केवल शिक्षक का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक मार्गदर्शक और संस्कृति रक्षक का भी है।

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