“पहचान मिली, सम्मान अब भी बाकी” — चांडिल अनुमंडल के छऊ कलाकारों की हुंकार, सम्मेलन बना अधिकारों का मंच – 30 दलों का संगम

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चांडिल, 13 अप्रैल : चांडिल अनुमंडल में आयोजित भव्य छऊ नृत्य सम्मेलन इस बार सिर्फ सांस्कृतिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि कलाकारों के अधिकार, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा की बुलंद आवाज बनकर सामने आया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों और लोक धुनों के बीच कलाकारों ने अपनी वर्षों पुरानी उपेक्षा को खुलकर व्यक्त किया।
सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड अंतर्गत जामडीह कला केंद्र में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि सह जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने फीता काटकर एवं दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने अपने संबोधन में छऊ नृत्य को क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बताते हुए इसके संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया, साथ ही कलाकारों के योगदान को सम्मान देने की आवश्यकता भी रेखांकित की।

30 दलों ने बिखेरा संस्कृति का रंग

सम्मेलन में चांडिल, नीमडीह, ईचागढ़ व आसपास के क्षेत्रों से 30 से अधिक छऊ नृत्य दलों ने हिस्सा लिया। पारंपरिक वेशभूषा, आकर्षक मुखौटे और लोक वाद्य यंत्रों की थाप पर कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। हर प्रस्तुति में लोकजीवन, पौराणिक कथाओं और समृद्ध परंपरा की झलक स्पष्ट दिखाई दी।

मंच बना मांगों की आवाज

इस सांस्कृतिक मंच को कलाकारों ने अपने हक की आवाज उठाने का माध्यम भी बनाया। मांग पत्र के जरिए उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं

◆ वृद्ध एवं असहाय कलाकारों के लिए मासिक पेंशन
◆ पंजीकृत छऊ दलों को वार्षिक प्रोत्साहन राशि
◆ जिले में छऊ कला केंद्र एवं प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना

“वैश्विक पहचान, स्थानीय उपेक्षा”

कलाकारों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छऊ नृत्य को पहचान मिलने के बावजूद स्थानीय स्तर पर उन्हें उचित मानदेय और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उनका कहना था कि कला संरक्षण की बातें तो होती हैं, लेकिन कलाकारों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए ठोस कदम अब तक नहीं उठाए गए हैं।

आश्वासन मिला, अब कार्रवाई की उम्मीद

जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने कलाकारों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को जिला परिषद की बैठक में प्राथमिकता के साथ उठाया जाएगा और सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाएगा।
इस प्रकार, चांडिल का यह छऊ नृत्य सम्मेलन केवल परंपरा का उत्सव नहीं, बल्कि कलाकारों के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई का एक सशक्त मंच बनकर उभरा।

इस मौके पर पूर्व जिला परिषद सदस्य सह भाजपा नेत्री अनिता पारित, समाजसेवी रुद्रप्रताप महतो सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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