आदिवासी समाज की दहाड़ हक छीनने का प्रयास ना करे कुड़मी समाज, धरना-प्रदर्शन में उमड़े लोग

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आदिवासी समाज की दहाड़ हक छीनने का प्रयास ना करे कुड़मी समाज, धरना-प्रदर्शन में उमड़े लोग

चांडिल, 08 अक्टूबर : कुड़मी (कुर्मी) जाति को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल करने की मांग के विरोध में बुधवार को आदिवासी सामाजिक संगठन की ओर से चांडिल अनुमंडल मुख्यालय में विशाल धरना-प्रदर्शन किया गया। धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग पारंपरिक परिधान और झंडों के साथ शामिल हुए। आदिवासी पुरुष, महिलाएं और युवा धरना-प्रदर्शन के दौरान पारंपरिक नृत्य, गीत और नारों के माध्यम से कुड़मी समाज के मांग पर अपनी असहमति जताई।

 

आदिवासी नेताओं ने कहा कि कुड़मी जाति की मांग वास्तविक आदिवासियों के अधिकारों, आरक्षण और पहचान पर सीधा आघात है। आदिवासी नेताओं ने कहा कि कुड़मी समुदाय ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से आदिवासी नहीं है, इसलिए उन्हें एसटी का दर्जा देना न्यायसंगत नहीं होगा। धरना-प्रदर्शन केक दौरान आदिवासी समाज के नेताओं ने कुड़मी समाज के मांग को अनुचित बताते हुए जमकर दहाड़ते हुए कहा कि कुड़मी समाज आदिवासियों का हक छीनने का प्रयास ना करे।

धरना-प्रदर्शन के दौरान आदिवासी सामाजिक संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल चांडिल के अनुमंडल पदाधिकारी को राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम मांग पत्र सौंपा। पत्र में कुरमी/कुड़मी जाति को एसटी सूची में शामिल नहीं करने, झारखंड राज्य में 1996 पेसा कानून लागू करने, झारखंड राज्य के पांचवी अनुसूचित जिले में नगर निगम चुनाव नहीं कराने और भारत सरकार द्वारा घोषित जातीय जनगणना से पहले सरना कोड लागू करने की मांग की गई है।

आदिवासी सामाजिक संगठन ने कहा कि वर्तमान में आदिवासी समाज के अधिकार, अस्मिता एवं पहचान को सामंतवादी ताकत एवं विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा कमजोर कर मिटाने का षड्यंत्र किया जा रहा है। धरना-प्रदर्शन में जिला परिषद सदस्य असित सिंह पातर, जिला परिषद सदस्य ज्योतिलाल माझी, जिला परिषद सदस्य सविता मार्डी, जिला परिषद के पूर्व सदस्य मानकी माधव सिंह मुंडा, सुधीर किस्कू, रवींद्र सरदार, प्रबोध उरांव के अलावा रांची, जमशेदपुर व अन्य स्थानों से आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि और छात्र-युवा संगठन के सदस्य मौजूद थे।

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