चांडिल : तमोलिया पंचायत का कारनामा – वंशावली में आदिवासी खतियानधारी को बता दिया निर्वंश, जमीन बचाने की लड़ाई कोर्ट तक पहुंची

MANBHUM UPDATES
5 Min Read

चांडिल : तमोलिया पंचायत का कारनामा – वंशावली में आदिवासी खतियानधारी को बता दिया निर्वंश, जमीन बचाने की लड़ाई कोर्ट तक पहुंची

चांडिल, 21 जुलाई : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अंचल अंतर्गत तमोलिया पंचायत एक बार फिर जमीन के विवादित मामलों को लेकर सुर्खियों में है। आरोप है कि पंचायत क्षेत्र में वर्षों से आदिवासी जमीनों की खरीद-बिक्री नियमों को दरकिनार कर खुलेआम की जा रही है और अब जमीन पर कब्जे के लिए वंशावली जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में भी कथित हेरफेर किए जाने लगे हैं। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आने वाले समय में इस क्षेत्र में आदिवासियों की पुश्तैनी जमीनें तेजी से समाप्त होने का खतरा पैदा हो सकता है।

ताजा मामला तमोलिया पंचायत के पूड़ीसिली गांव का है, जहां भूमिज (आदिवासी) समाज की एक खतियानी जमीन को लेकर परिवार के दो पक्षों के बीच विवाद न्यायालय तक पहुंच चुका है। इसी विवाद के बीच दो अलग-अलग वंशावली सामने आने से पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।

आरोप है कि तमोलिया पंचायत के मुखिया, वार्ड पार्षद और ग्राम प्रधान के हस्ताक्षर से तैयार एक वंशावली में खतियानधारी रैयत रघु सिंह उर्फ रघुनाथ सिंह को निर्वंश घोषित कर दिया गया। वहीं, उसी पंचायत के पंचायत समिति सदस्य और उपमुखिया द्वारा प्रमाणित दूसरी वंशावली में स्पष्ट किया गया है कि रघु सिंह निर्वंश नहीं थे, बल्कि उनके पुत्र महा सिंह थे और महा सिंह की पुत्री बिजली सिंह उनकी वैध उत्तराधिकारी हैं।

नीमडीह थाना क्षेत्र के मधुपुर (बाड़ेदा) निवासी बिजली सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके दादा रघु सिंह उर्फ रघुनाथ सिंह के नाम खतियान में दर्ज भूमि पर भूमाफियाओं की नजर है। उनके पिता और दादा के निधन के बाद जमीन पर कब्जा करने की नीयत से फर्जी वंशावली तैयार कर उन्हें उत्तराधिकार से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है।

बिजली सिंह का आरोप है कि जमीन कारोबारियों की मिलीभगत से तमोलिया पंचायत के मुखिया, सत्ताधारी दल से जुड़ा पूर्व जिला परिषद सदस्य सहित अन्य लोगों द्वारा उनकी पुश्तैनी जमीन पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। इतना ही नहीं, विवादित भूमि पर निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल निर्माण कार्य रोकने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वह स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों, मुखिया, ग्राम प्रधान तथा अन्य संबंधित लोगों के विरुद्ध उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगी।

तमोलिया पंचायत में लंबे समय से आदिवासी जमीनों की खरीद-बिक्री को लेकर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका निष्पक्ष होने के बजाय कई मामलों में संदेह के घेरे में रही है। पंचायत का दायित्व जहां ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा करना है, वहीं यदि पंचायत स्तर पर जारी प्रमाण-पत्रों और वंशावली की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठने लगें तो यह पूरे राजस्व तंत्र और पंचायत व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। आदिवासी क्षेत्रों में भूमि संरक्षण के लिए बने कानूनों की भावना तभी सार्थक होगी, जब पंचायत प्रतिनिधि स्वयं उसकी रक्षा करें, न कि उन पर ही सवाल खड़े हों।

इस संबंध में तमोलिया पंचायत के मुखिया से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। हालांकि मुखिया प्रतिनिधि हरेंद्र सिंह ने कहा कि “कागजात के आधार पर ही वंशावली बनाई गई है। आप समाचार प्रकाशित कीजिए।”

फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय या जांच के बाद ही होगा। लेकिन दो अलग-अलग प्रमाणित वंशावलियों का सामने आना निश्चित रूप से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग करता है। यदि समय रहते इस प्रकार के मामलों पर रोक नहीं लगी तो आदिवासी क्षेत्रों में भूमि संरक्षण से जुड़े कानून केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे और भूमाफियाओं का मनोबल लगातार बढ़ता जाएगा।

Share This Article