
DESK, MANBHUM UPDATES | 16 APRIL
तेजी से डिजिटल होती दुनिया में ठगी के तरीके भी उतनी ही तेजी से बदल रहे हैं। अब अपराधी सीधे सड़क पर नहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन के जरिए युवाओं को निशाना बना रहे हैं। राज्य में कॉल गर्ल्स सर्विस के नाम पर चल रहा यह नया साइबर जाल खासतौर पर युवाओं को फंसाने के लिए डिजाइन किया गया है, जहां जिज्ञासा और आकर्षण ही सबसे बड़ा हथियार बन चुका है।
दरअसल, यह पूरा खेल मनोवैज्ञानिक तरीके से रचा जाता है। व्हाट्सएप पर आकर्षक युवतियों की तस्वीरें भेजी जाती हैं, जिससे सामने वाला व्यक्ति तुरंत प्रतिक्रिया दे। जैसे ही कोई युवक दिलचस्पी दिखाता है, उसे “बुकिंग” के नाम पर क्यूआर कोड भेजकर एडवांस पेमेंट करने को कहा जाता है। पैसा मिलते ही संपर्क तोड़ दिया जाता है। न कोई सर्विस, न कोई जवाब।
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब झारखंड के कोडरमा पुलिस ने एक संगठित गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी वेबसाइट और आईडी बनाकर खुद को प्रोफेशनल सर्विस प्रोवाइडर दिखाते थे। उनका पूरा नेटवर्क ऑनलाइन संचालित होता था, जहां एक क्लिक पर शिकार फंस जाता था।
युवाओं को समझना होगा यह ‘डिजिटल ट्रैप’
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के स्कैम में तकनीक से ज्यादा मानसिकता का इस्तेमाल होता है। अपराधी जानते हैं कि युवा वर्ग तेजी से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय है और निजी इच्छाओं को लेकर जल्दी निर्णय लेता है। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाता है।
कैसे बचें इस जाल से?
अनजान वेबसाइट या नंबर पर भरोसा न करें, चाहे ऑफर कितना भी आकर्षक क्यों न हो
किसी भी सर्विस के लिए एडवांस पेमेंट करने से पहले उसकी वैधता जांचें
क्यूआर कोड स्कैन कर पैसे भेजने से बचें, खासकर जब सामने वाला अज्ञात हो
किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस या साइबर सेल में शिकायत करें।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के मामलों में शर्म या झिझक छोड़कर तुरंत शिकायत करना जरूरी है, ताकि गिरोह के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके और अन्य लोग शिकार बनने से बच सकें।
यह सिर्फ ठगी का मामला नहीं, बल्कि डिजिटल युग में बढ़ती साइबर धोखाधड़ी का उदाहरण है। जरूरत है कि युवा आकर्षण और जल्दबाजी से बचें, क्योंकि स्क्रीन के उस पार बैठा व्यक्ति असलियत में सिर्फ एक ठग भी हो सकता है।