चांडिल : डोबो ग्राम सभा ने शराब दुकान संचालक को दस्तावेज सहित बैठक में बुलाया

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चांडिल : डोबो ग्राम सभा ने शराब दुकान संचालक को दस्तावेज सहित बैठक में बुलाया

चांडिल, 10 सितंबर : सरायकेला-खरसावां जिला में अंग्रेजी शराब दुकानों को लेकर विरोध की लहर लगातार तेज होती जा रही है। चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के कई इलाकों में स्थानीय ग्रामीण इन दुकानों के संचालन पर आपत्ति जता चुके हैं। चांडिल डैम रोड स्थित अंग्रेजी शराब दुकान को स्थानांतरित करने की मांग को लेकर जहां महिलाएं लगातार धरना-प्रदर्शन कर रही हैं, वहीं इस मुद्दे पर जनाक्रोश इतना बढ़ा कि ग्रामीणों ने हाल ही में विधायक और सांसद का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया था।

 

अब इसी कड़ी में डोबो गांव की ग्राम सभा ने भी अपनी सख्त आपत्ति दर्ज की है। ग्राम सभा की ओर से अंग्रेजी शराब दुकान संचालक को एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया है। इस पत्र में पारंपरिक ग्राम प्रधान शंकर सिंह ने स्पष्ट किया है कि सरायकेला-खरसावां जिला पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है और डोबो ग्राम सभा उसी श्रेणी में आती है। अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को संविधान द्वारा विशेष अधिकार प्राप्त हैं।

 

ग्राम प्रधान ने पत्र में अनुच्छेद 13(3)(क) का हवाला देते हुए कहा है कि अनुसूचित राज्यों में लागू आदेश, अधिनियम, अधिसूचना और परंपराएं ‘विधि का बल’ रखती हैं। ऐसे में ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसी भी अंग्रेजी शराब दुकान का संचालन नियमों का उल्लंघन है।

 

ग्राम सभा ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि डोबो स्थित अंग्रेजी शराब दुकान का संचालक अपने संचालन से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज लेकर 13 सितंबर को सुबह 11:30 बजे ग्राम सभा की बैठक में उपस्थित हों। ग्राम सभा ने चेतावनी दी है कि यदि संचालक निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं होते हैं अथवा संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत करने में असफल रहते हैं, तो उनके विरुद्ध संवैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

 

इस संबंध में पत्र की एक प्रति डोबो ग्राम सभा निगरानी समिति के अध्यक्ष अनुप कुमार महतो को भी सौंपी गई है, ताकि बैठक की निगरानी और आगे की कार्यवाही पारदर्शी ढंग से हो सके।

 

ग्रामीणों का कहना है कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में शराब दुकानों का संचालन सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। इसलिए अब ग्राम सभाएं एकजुट होकर इस तरह की गतिविधियों का विरोध कर रही हैं और संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं।

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