चांडिल-चौका में नकली लॉटरी का काला कारोबार, पुलिस की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

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चांडिल, 27 अगस्त : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल एवं चौका थाना क्षेत्र में प्रतिबंधित और नकली लॉटरी का गोरखधंधा धड़ल्ले से चल रहा है। चाय व पान की टपरी, दुकानों, ठेलों और खोमचों पर खुलेआम लॉटरी बेचे जा रहे हैं, वहीं खास ग्राहकों तक लॉटरी व्हाट्सएप के जरिए भी पहुंचाई जा रही है। सवाल यह है कि जब यह कारोबार सबकी नजरों के सामने चल रहा है तो फिर स्थानीय पुलिस प्रशासन आखिर खामोश क्यों है?
नकली लॉटरी से राज्य को करोड़ों का नुकसान
ये लॉटरी पश्चिम बंगाल, असम और सिक्किम की लॉटरी की हूबहू नकल करके छापी जाती हैं और चोरी-छिपे झारखंड में लाई जाती हैं। सूत्रों के अनुसार इस धंधे से झारखंड सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है। स्थानीय लोगों से जानकारी प्राप्त हुई हैं कि चांडिल के सीमंत नाम का व्यक्ति इसका मुख्य संचालक है, जबकि कन्हैया नामक व्यक्ति चांडिल और चौका क्षेत्र में डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में सप्लाई करता है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर कई अन्य लोग इस अवैध कारोबार में सक्रिय बताए जा रहे हैं।

पुलिस की नाकामी पर सवाल
यह कोई छिपा सच नहीं है कि क्षेत्र में नकली लॉटरी का कारोबार चरम पर है। बावजूद इसके पुलिस प्रशासन कार्रवाई करने से बच रहा है। जानकार मानते हैं कि पुलिस की नाकामी और मौन रवैया इस पूरे धंधे को और बढ़ावा दे रहा है। आखिर क्यों पुलिस इस पर नकेल कसने में विफल है — यह बड़ा सवाल क्षेत्रवासियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
युवा पीढ़ी और गरीब तबका हो रहा बर्बाद
इस अवैध लॉटरी के दुष्प्रभाव समाज पर साफ दिखाई दे रहे हैं। युवा वर्ग अपनी पढ़ाई-लिखाई के पैसे लॉटरी में बर्बाद कर रहा है। वहीं, दिहाड़ी मजदूर और गरीब तबका अपने दिनभर की कमाई इस जुए में लुटा रहे हैं। शाम होते-होते जब लॉटरी का रिजल्ट घोषित होता है तो अधिकांश लोग मायूस और खाली हाथ घर लौटते हैं। कई घरों में इससे घरेलू कलह और हिंसा तक की नौबत आ रही है।




