ईचागढ़ : बारिश से ढहा मकान, तीन दिनों से तंबू में रहने को मजबूर पीड़ित परिवार

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ईचागढ़ : बारिश से ढहा मकान, तीन दिनों से तंबू में रहने को मजबूर पीड़ित परिवार

ईचागढ़, 26 अगस्त : लगातार हो रही भारी बारिश से चांडिल अनुमंडल क्षेत्र का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बारिश के कारण कई घर ढह गए हैं, जिससे प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे जीवनयापन करने को विवश हैं। इसी कड़ी में ईचागढ़ प्रखंड के पंचायत बांदु अंतर्गत हूरलूंग गांव निवासी आनंद मांझी का मकान भी शनिवार को ढह गया। हादसे में उनके पालतू पशुओं की भी मौत हो गई, जिससे परिवार को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

घर ढहने के बाद से मांझी का परिवार छोटे-छोटे बच्चों के साथ प्लास्टिक तिरपाल के नीचे अस्थायी तंबू बनाकर रह रहा है। स्थिति बेहद दयनीय है और हर पल खतरे से भरी हुई है।

इस बीच, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सरायकेला के सचिव के आदेश पर ईचागढ़ प्रखंड के पीएलवी गंगा सागर पाल ने सोमवार को हूरलूंग गांव पहुंचकर क्षतिग्रस्त मकान का जायजा लिया और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने आश्वस्त किया कि परिवार को हर संभव सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

पीएलवी गंगा सागर पाल ने पीड़ित आनंद मांझी के साथ अंचल कार्यालय, ईचागढ़ पहुंचकर आपदा प्रबंधन विभाग से राहत राशि दिलाने हेतु आवेदन फॉर्म भरवाकर जमा किया। साथ ही, उन्होंने प्रखंड विकास पदाधिकारी से बातचीत कर पीड़ित परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा आबुआ आवास योजना का लाभ देने की मांग भी की।

हालांकि, सबसे बड़ी समस्या यह है कि हूरलूंग गांव चांडिल डैम विस्थापित क्षेत्र में आता है। इसी कारण प्रभावित परिवार को अब तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया है। विस्थापन का दंश झेल रहे इस परिवार के लिए अब भारी बारिश नई आफत बनकर आई है।

प्रशासन की ओर से फिलहाल पीड़ित परिवार को एक तिरपाल उपलब्ध कराया गया है, जिसे मंगलवार को आनंद मांझी की पत्नी पूजा मांझी को सौंपा गया। वहीं बुधवार को उन्हें राशन सामग्री भी दिए जाने की बात कही गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे विस्थापित परिवारों की पहचान कर उन्हें स्थायी पुनर्वास की सुविधा देनी चाहिए। अन्यथा, उन्हें वर्तमान आवासीय क्षेत्र में ही सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

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