चांडिल : आसनबनी जांताल पूजा स्थल और भूमि विवाद में नया मोड़, पक्ष-विपक्ष आमने-सामने

चांडिल, 21 अगस्त : चांडिल अंचल के आसनबनी गांव स्थित जांताल पूजा स्थल एवं आदिम जनजाति समुदाय की रैयती भूमि पर कथित अवैध कब्जे को लेकर चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। बुधवार शाम ग्राम प्रधान प्रबोध उरांव के नेतृत्व में ग्रामीणों की बैठक हुई, जिसमें कई लोग उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान प्रबोध उरांव और दिलीप महतो ने दावा किया कि जांताल पूजा स्थल पर किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं हुआ है और न ही पूजा स्थल अशुद्ध हुआ है। उन्होंने कहा कि पूजा स्थल को लेकर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। साथ ही आगामी 24 अगस्त को “शुद्धिकरण” किए जाने की चर्चा पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह स्थल सार्वजनिक है और इसका शुद्धिकरण कराने की जरूरत नहीं है।
हालांकि, आदिम जनजाति समुदाय के प्रतिनिधियों ने इन दावों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पूजा स्थल के पास की रैयती भूमि पर वर्षों से कब्जा करने की कोशिशें होती रही हैं और हाल के दिनों में भी भूमाफिया द्वारा ऐसा प्रयास किया गया। समुदाय का आरोप है कि बाहरी लोगों के अलावा गांव के ही कुछ प्रभावशाली लोग भी इस कब्जे में सहयोग कर रहे हैं।
इसी बीच, प्रबोध उरांव और दिलीप महतो से यह भी सवाल उठ रहा है कि जिस जमीन विवाद में हाल ही में एक ग्रामीण को जेल जाना पड़ा था, उसमें उनकी क्या भूमिका रही? क्या उन्होंने कभी आदिम जनजाति समुदाय के भूमि संरक्षण के प्रयासों में सक्रिय सहयोग दिया?
ग्रामीणों का कहना है कि जांताल पूजा स्थल और भूमि विवाद को लेकर अब स्पष्टता जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति अथवा कंपनी द्वारा अवैध निर्माण कार्य किया जा रहा है तो यह मामला प्रशासन और न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में व्यक्तिगत नामों को जबरन जोड़ना उचित नहीं होगा।
कुल मिलाकर, आसनबनी में यह विवाद अब दो ध्रुवों में बंटता नजर आ रहा है—एक पक्ष का कहना है कि पूजा स्थल पर कोई अतिक्रमण नहीं है, जबकि दूसरा पक्ष अपनी रैयती भूमि पर लगातार हो रहे कब्जे का आरोप दोहरा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और आगे की स्थिति किस दिशा में जाती है।



