मासूमों की सुरक्षा से खिलवाड़! शिक्षक की मांग में सड़क पर उतरे स्कूली बच्चे, शिक्षा विभाग ने जांच के दिए निर्देश

MANBHUM UPDATES
4 Min Read

मासूमों की सुरक्षा से खिलवाड़! शिक्षक की मांग में सड़क पर उतरे स्कूली बच्चे, शिक्षा विभाग ने जांच के दिए निर्देश

कुकडू, 14 जुलाई : सरायकेला-खरसावां जिले के कुकडू मध्य विद्यालय के छात्रों द्वारा अपने प्रिय शिक्षक संजीव बनर्जी के तबादले के विरोध में किए गए प्रदर्शन ने शिक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोमवार को विद्यालय के सैकड़ों छोटे – बड़े छात्र-छात्राएं विद्यालय छोड़कर कुकडू प्रखंड मुख्यालय पहुंच गए और शिक्षक को वापस लाने की मांग करने लगे। हालांकि, इस घटनाक्रम में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जो लापरवाही सामने आई है, वह अब विभागीय जांच के घेरे में आ गई है।

छोटे-छोटे स्कूली बच्चों का बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के मुख्य सड़क होते हुए प्रशासनिक कार्यालय तक पहुंचना गंभीर चूक मानी जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम में यदि कोई दुर्घटना हो जाती, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती? यही सवाल आज इलाके के लोग और अभिभावक प्रशासन से पूछ रहे हैं। क्योंकि, जिस मुख्य सड़क से होकर विद्यार्थी अपने स्कूल से प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचे थे उस सड़क मार्ग पर हर समय तेज रफ्तार से छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होता है।

इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी (DSE) कैलाश मिश्रा ने स्पष्ट रूप से कहा है कि “पढ़ाई की घंटी के दौरान बच्चों को विद्यालय परिसर से बाहर भेजना नियमों के विरुद्ध है। इस पूरे मामले की जांच की जा रही है और जो भी शिक्षक या प्रधानाध्यापक इसमें दोषी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस विरोध प्रदर्शन में किसी बाहरी व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षक संजीव बनर्जी बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय रहे हैं और उनके तबादले से बच्चों में निराशा स्वाभाविक है। लेकिन बच्चों की भावनाओं की आड़ में उनकी सुरक्षा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।

प्रश्न उठ रहे हैं कि — क्या स्कूल प्रशासन को इस प्रदर्शन की जानकारी थी?क्या छात्रों को स्कूल से निकलने की अनुमति दी गई थी? क्या स्कूल प्रबंधन समिति और अभिभावकों को इस बारे में सूचना दी गई?

यदि इन प्रश्नों का उत्तर “नहीं” है, तो यह बच्चों के साथ एक गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता का मामला है।

शिक्षा विभाग अब इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहा है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। विभाग की ओर से जल्द ही सभी विद्यालयों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है, जिसमें यह अनिवार्य किया जाएगा कि किसी भी प्रकार की मांग या विरोध प्रदर्शन में छात्रों को शामिल करने से पहले अभिभावकों और प्रशासन की अनुमति ली जाए।

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा के प्रति केवल भावनाओं के आधार पर निर्णय लेना भारी पड़ सकता है। जरूरत है विवेक और जिम्मेदारी के साथ कदम उठाने की — ताकि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान नहीं, बल्कि बच्चों का सम्पूर्ण संरक्षण भी हो सके।

Share This Article