आसनबनी की जांताल पूजा की भूमि पर कब्जे की साजिश, संघर्ष की राह पर भूषण पहाड़िया – बोले, ‘हमारा संघर्ष जारी था…जारी रहे

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“आसनबनी की जांताल पूजा की भूमि पर कब्जे की साजिश, संघर्ष की राह पर भूषण पहाड़िया – बोले, ‘हमारा संघर्ष जारी था…जारी रहेगा’”

चांडिल (सरायकेला-खरसावां), 08 जुलाई :सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अंचल स्थित आसनबनी में पारंपरिक जांताल पूजा स्थल को बचाने को लेकर आदिवासी समाज के एक प्रमुख युवा एवं पारंपरिक लाया (पुजारी) भूषण पहाड़िया ने लंबे समय से संघर्ष छेड़ रखा है। पारंपरिक पूजा स्थल को भू-माफिया सिंडिकेट द्वारा कब्जाने की कोशिशों का विरोध करने पर उन्हें पूर्व के एक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। आज भूषण पहाड़िया को जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा किया गया, जिसके बाद उन्होंने खुलकर अपनी बात मीडिया और समर्थकों के सामने रखी।

भूषण पहाड़िया का आरोप :

जेल से रिहा होने के बाद भूषण पहाड़िया ने साफ कहा कि – “सत्ता पक्ष, विपक्ष और भूमाफिया गिरोह ने मिलकर मुझे झूठे मुकदमे में फंसाया, क्योंकि मैं जांताल पूजा स्थल पर उनकी गिद्ध निगाहों का विरोध कर रहा था। लेकिन मैं डरा नहीं हूं, ना समझौता करूंगा। लड़ेंगे…और जीतेंगे।”

पुराना मामला बना हथियार :

बताया जाता है कि कपाली नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष सरवर आलम ने सालभर पहले चांडिल थाना में भूषण पहाड़िया के खिलाफ भूमि विवाद से जुड़ी एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। उसी एफआईआर के आधार पर हाल ही में चांडिल पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और जेल भेजा था।

जमीन घोटालों की ज़द में कई इलाके :

चांडिल अंचल के आसनबनी, चिलगु, कपाली, डोबो, पूड़ीसिली, गौरी जैसे क्षेत्रों में बीते कुछ वर्षों से अवैध रूप से जमीन खरीद-बिक्री का सिलसिला जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन क्षेत्रों में भू-माफियाओं द्वारा कागजात में हेराफेरी कर परंपरागत, धार्मिक, सीएनटी और सामुदायिक जमीनों पर भी कब्जा किया जा रहा है। प्रशासनिक चुप्पी और राजनीतिक संरक्षण ने इस नेटवर्क को और भी बेखौफ बना दिया है।

भूषण पहाड़िया की चेतावनी :

पहाड़िया ने सख्त लहजे में कहा – “तुम झूठा मुकदमा दर्ज करवा सकते हो, जेल में डाल सकते हो, डराने की कोशिश कर सकते हो, लेकिन हम अपनी जांताल पूजा की भूमि किसी को नहीं सौंपेंगे। हमारा संघर्ष जारी था…जारी रहेगा।”

स्थानीयों की मांग :

स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध भूमि खरीद-बिक्री की जांच की जाए और जांताल पूजा स्थल जैसे पारंपरिक स्थलों को संरक्षित किया जाए।

यह मामला सिर्फ एक भूमि विवाद का नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय की आस्था, परंपरा और अधिकारों की रक्षा का है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मुद्दे पर निष्पक्ष कार्रवाई करता है या फिर भू-माफियाओं की साजिशों को चुपचाप बढ़ने देता है।

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