झारखंड में एक करोड़ और ओडिशा में 1.20 करोड़ रुपये था इनाम, 55 से अधिक नक्सली मामलों में वांछित – कोलकाता STF के सामने आत्मसमर्पण की रिपोर्ट
रांची/मेदिनीपुर, 17 सितंबर :भाकपा माओवादी के सेंट्रल कमिटी सदस्य और लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने असीम मंडल उर्फ आकाश उर्फ तिमिर उर्फ मनोज उर्फ दीपक उर्फ राकेश के पुलिस के सामने आने की खबर है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार असीम मंडल ने गुरुवार को कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के सामने आत्मसमर्पण किया है। हालांकि पश्चिम बंगाल की एक रिपोर्ट में उसे पूर्व मेदिनीपुर के पटाशपुर से गिरफ्तार किए जाने की बात भी कही गई है। ऐसे में उसकी कार्रवाई को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।
असीम मंडल पर झारखंड सरकार ने एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था, जबकि ओडिशा सरकार की ओर से भी उसके ऊपर 1.20 करोड़ रुपये का इनाम था। इस तरह दोनों राज्यों में उस पर कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वह पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना थाना क्षेत्र के उत्तर फुलचक का रहने वाला बताया जाता है। उसके खिलाफ विभिन्न थानों में 55 से अधिक नक्सली और आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
सारंडा और कोल्हान में रहा प्रमुख सक्रिय चेहरा
असीम मंडल का नाम झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के प्रमुख चेहरों में रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार उसका दस्ता लंबे समय तक झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा से लगे जंगलों में सक्रिय रहा। जुलाई 2026 में शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान असीम मंडल और अन्य बचे हुए प्रमुख कमांडरों पर केंद्रित होने की बात सामने आई थी।
हाल के दिनों में असीम मंडल के दस्ते पर सुरक्षा बलों का दबाव बढ़ने की खबरें सामने आती रही हैं। 14 सितंबर के आसपास ऐसी रिपोर्टें सामने आई थीं कि खराब स्वास्थ्य और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के बीच उसने अपना सशस्त्र दस्ता भंग कर जंगल से बाहर निकलने का फैसला किया था। इसके बाद उसके पुलिस के सामने आने की खबर सामने आई है।
असीम के दस्ते पर कई बड़े हमलों के आरोप
सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार असीम मंडल के दस्ते से जुड़े कई मुठभेड़ और हमले पश्चिमी सिंहभूम में हुए हैं। एक मार्च 2026 को चाईबासा के छोटानागरा थाना क्षेत्र के मारांगपोंगा में माओवादी दस्ते के साथ मुठभेड़ में 209 कोबरा बटालियन के सहायक समादेष्टा समेत दो सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे।
इससे पहले 12 अप्रैल 2025 को जराइकेला थाना क्षेत्र के राधापोरा में झारखंड जगुआर का एक जवान शहीद हुआ था। वहीं 11 जनवरी 2023 को टोंटो थाना क्षेत्र के तुंबाहाका में मुठभेड़ और आईईडी विस्फोट में 209 कोबरा बटालियन के नौ सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे। 31 मार्च 2020 को कराईकेला थाना क्षेत्र के जोन्वा में हुए हमले में एक जवान की मौत हुई थी। इसके अलावा एक जुलाई 2018 को पूर्वी सिंहभूम के एमजीएम थाना क्षेत्र स्थित झाटी पहाड़ी में माओवादी हमले में भी एक जवान के शहीद होने की जानकारी रिपोर्टों में दी गई है।
दस्ते के सदस्यों ने भी डाले हथियार
असीम मंडल के पुलिस के सामने आने से पहले उसके दस्ते से जुड़े कई सदस्यों के आत्मसमर्पण की खबर सामने आ चुकी है। पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा में 15 लाख रुपये के इनामी रीजनल कमेटी सदस्य राम प्रसाद मार्डी उर्फ सचिन, उसकी पत्नी और 10 लाख रुपये की इनामी जोनल कमांडर मीता उर्फ नयनतारा तथा एक अन्य सदस्य गौरी के आत्मसमर्पण की जानकारी सामने आई थी।
इन आत्मसमर्पणों के बाद असीम मंडल के दस्ते की सक्रियता और नेटवर्क को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी और बढ़ गई थी। इसी बीच असीम मंडल के पुलिस के सामने आने की खबर को झारखंड और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
पूछताछ से खुल सकते हैं कई राज
असीम मंडल से पूछताछ में उसके संगठन के बचे हुए सदस्यों, हथियारों के ठिकानों, पुराने संपर्कों, सीमा क्षेत्र में मौजूद नेटवर्क और संगठन की गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार झारखंड पुलिस की एक टीम भी उससे पूछताछ के लिए कोलकाता जाने की तैयारी में है।
असीम मंडल का पुलिस के सामने आना ऐसे समय हुआ है, जब झारखंड के कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान लगातार जारी है। पिछले कुछ महीनों में शीर्ष माओवादी नेताओं की गिरफ्तारी और कई कैडरों के आत्मसमर्पण से क्षेत्र में माओवादी संगठन की गतिविधियों को लेकर लगातार नए घटनाक्रम सामने आए हैं।
असीम मंडल से पूछताछ और आगे की पुलिसिया कार्रवाई के बाद ही उसके खिलाफ दर्ज मामलों, उसकी भूमिका और संगठन के वर्तमान नेटवर्क से जुड़े और तथ्य स्पष्ट हो सकेंगे।



